टोक्यो की नाराज़गी की परवाह किए बिना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को विवादित कुरील द्वीपों का अपना पहला व्यक्तिगत दौरा किया. सखालिन द्वीप के पास रूसी पैसिफिक फ्लीट के नौसैनिक युद्धाभ्यास का निरीक्षण करने के बाद पुतिन इतुरुप द्वीप (जापान में एतोरोफु) पहुंचे. वहां उन्होंने औद्योगिक परियोजनाओं का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से मुलाकात की.
2010 के बाद यह पहला मौका है जब किसी रूसी राष्ट्रपति ने विवादित द्वीप समूह का दौरा किया है. इसे मॉस्को की ओर से इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता के दावे का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है.
जापान ने इस दौरे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राजदूत स्तर पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया. जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कहा, ”यह द्वीप समूह, जिसे जापान में “नॉर्दर्न टेरिटरीज़” कहा जाता है, “ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के अनुसार जापान का अभिन्न हिस्सा है.” उन्होंने कहा कि पुतिन का दौरा जापानी जनता की भावनाओं को आहत करता है और दोनों देशों के संबंध सामान्य होने की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाता है.
दूसरे विश्व युद्ध के अंत से चला आ रहा यह विवाद आज उत्तर प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक तनाव का बड़ा कारण बन चुका है. यूक्रेन युद्ध और चीन और उत्तर कोरिया के साथ रूस की बढ़ती सैन्य साझेदारी ने इसे और संवेदनशील बना दिया है.
सखालिन से इतुरुप तक: कैसा रहा पुतिन का दौरा?
पुतिन का सुदूर पूर्व का दौरा रूस के पैसिफिक फ्लीट के बड़े नौसैनिक अभ्यासों के निरीक्षण से शुरू हुआ. उन्होंने सखालिन द्वीप के पास आयोजित सैन्य अभ्यास देखा और मिसाइल क्रूज़र ‘वार्याग’ का दौरा किया. यहां नौसेना अधिकारियों ने उन्हें अभियान की जानकारी दी और उन्होंने लाइव मिसाइल अभ्यास भी देखा.
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती के अनुसार, इसके बाद पुतिन ने सखालिन में एक बंद कमरे की बैठक में रूस की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा की समीक्षा की.
इसके बाद वे इतुरुप द्वीप पहुंचे, जो जापान द्वारा दावा किए जाने वाले चार दक्षिणी कुरील द्वीपों में सबसे बड़ा और सबसे रणनीतिक द्वीप है.
क्रेमलिन द्वारा जारी वीडियो में पुतिन को यास्नी फिश प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण करते हुए देखा गया. उन्होंने कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं देखीं, हैलिबट और टूना मछलियों के भंडार का जायजा लिया, मछली के अंडों (रो) का स्वाद चखा और स्थानीय कैवियार उपहार के रूप में स्वीकार किया.
जापान की प्रतिक्रिया
टोक्यो में इस दौरे पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने नाराज़गी जताई. प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कहा, “उत्तरी क्षेत्र ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों के अनुसार जापान का अभिन्न हिस्सा हैं. राष्ट्रपति पुतिन का दौरा पूरी तरह अस्वीकार्य है. इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा.”
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने भी कहा कि टोक्यो ने जापान स्थित रूसी दूतावास और मॉस्को में राजनयिक माध्यमों से औपचारिक विरोध दर्ज कराया है.
कुरील द्वीप क्या हैं?
कुरील द्वीप उत्तरी प्रशांत महासागर में स्थित 56 ज्वालामुखीय द्वीपों और दर्जनों छोटी चट्टानों की एक श्रृंखला है, जो लगभग 1,200 किलोमीटर तक फैली हुई है. यह द्वीप श्रृंखला रूस के कामचटका प्रायद्वीप से शुरू होकर जापान के सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो तक पहुंचती है. भौगोलिक रूप से यह ओखोटस्क सागर और प्रशांत महासागर के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है. पूरे द्वीप समूह पर रूस का प्रशासनिक नियंत्रण है, लेकिन होक्काइडो के निकट स्थित चार दक्षिणी द्वीपों पर जापान अपना दावा करता है.
इतुरुप (एतोरोफु)
लगभग 3,185 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला इतुरुप विवादित चारों द्वीपों में सबसे बड़ा और सबसे रणनीतिक माना जाता है. यहां ऊंचे पर्वत, सक्रिय ज्वालामुखी, गहरे समुद्री तट, सैन्य और नागरिक उपयोग का यास्नी एयरपोर्ट और यास्नी फिश प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र मौजूद हैं. हाल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसी द्वीप का दौरा किया.
कुनाशीर (कुनाशिरी)
करीब 1,490 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला कुनाशीर जापान के होक्काइडो स्थित नेमुरो प्रायद्वीप से केवल 15–20 किलोमीटर दूर है. इस द्वीप पर विवादित क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रशासनिक बस्ती युझनो-कुरिल्स्क स्थित है. यहां घने शंकुधारी जंगल और प्रसिद्ध सक्रिय ज्वालामुखी माउंट त्यात्या भी मौजूद हैं.
शिकोटन
लगभग 250 वर्ग किलोमीटर में फैला शिकोटन अपेक्षाकृत छोटा द्वीप है. यहां ढलानदार पहाड़ियां, खूबसूरत समुद्री चट्टानें और क्राबोज़ावोद्स्कोये और मालोकुरिल्स्कोये नामक दो बड़े प्राकृतिक बंदरगाह हैं. यही बंदरगाह पूरे साल चलने वाले समुद्री खाद्य उद्योग का आधार हैं.
हाबोमाई द्वीप समूह
हाबोमाई वास्तव में कई छोटे, सपाट और अधिकांशतः निर्जन द्वीपों एवं चट्टानों का समूह है, जो होक्काइडो से कुछ ही दूरी पर स्थित है. यहां स्थायी नागरिक आबादी नहीं है, लेकिन रूस ने सीमा सुरक्षा चौकियां, रडार प्रणाली और समुद्री निगरानी सुविधाएं स्थापित कर रखी हैं. आसपास का समुद्री क्षेत्र मछली पकड़ने के लिए भी बेहद समृद्ध माना जाता है.
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में इन विवादित द्वीपों पर लगभग 20,000 रूसी नागरिक रहते हैं, जिनमें अधिकांश इतुरुप और कुनाशीर में बसे हुए हैं. दूसरे विश्व युद्ध से पहले इन चारों द्वीपों पर करीब 17,000 जापानी नागरिक और वहां के मूल निवासी ऐनू समुदाय के लोग रहते थे. हालांकि, 1945 से 1948 के बीच सोवियत संघ ने सभी जापानी निवासियों को वहां से हटाकर जापान के होक्काइडो द्वीप भेज दिया, जिसके बाद से इन द्वीपों पर रूस का प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है.

जापान–रूस कुरील विवाद: संक्षिप्त टाइमलाइन
1855 – शिमोडा संधि: चार दक्षिणी द्वीप जापान के हिस्से में रहे.
1875- सेंट पीटर्सबर्ग संधि: जापान को पूरा कुरील द्वीपसमूह मिला, रूस को सखालिन.
1945- सोवियत संघ ने दक्षिणी कुरील द्वीपों पर कब्ज़ा कर लिया.
1951- सैन फ्रांसिस्को शांति संधि; विवाद बरकरार रहा.
1956- जापान–सोवियत संयुक्त घोषणा; शिकोतान और हाबोमाई लौटाने का प्रस्ताव, लेकिन समझौता नहीं हुआ.
1993- टोक्यो घोषणा; बातचीत से समाधान पर सहमति.
2010- रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव का विवादित द्वीपों का दौरा.
2018- दोनों देशों ने वार्ता आगे बढ़ाई, लेकिन समाधान नहीं निकला.
2022- यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने शांति वार्ता और संयुक्त परियोजनाएं रोक दीं.
2026- राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार इतुरुप द्वीप का दौरा किया, जिस पर जापान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया.
