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अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन दोषी करार, कपिल मिश्रा बोले- ‘खंजर देने वाला कोई और…’


उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों (Delhi Riots) 2020 के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत का बड़ा फैसला आ गया है. इस फैसले के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) पर जोरदार हमला बोला है. कपिल मिश्रा ने इस हत्याकांड के पीछे एक बड़ी साजिश का दावा करते हुए कहा है कि इस मामले में अभी पूरा न्याय होना बाकी है.

कपिल मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हम छह साल से इस दिन का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने अंकित शर्मा की हत्या की बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा, “2020 के दंगों के दौरान अंकित शर्मा को खींचकर ताहिर हुसैन के घर ले जाया गया. मरने के बाद भी उनके शरीर पर चाकुओं से कई वार किए गए. खंजर भले ही ताहिर हुसैन और उसके साथियों के हाथों में था, लेकिन यह खंजर देने वाला कोई और है.” मिश्रा ने आरोप लगाया कि दंगों के पीछे का असली मकसद हिंदुओं की हत्या करना और उन्हें इलाके से पलायन के लिए मजबूर करना था.

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‘AAP नेताओं ने दंगाइयों को बचाया’

कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उस समय AAP सरकार ने दंगाइयों को बचाने का काम किया.

मिश्रा ने कहा, “आज सुंदरकांड का पाठ करने और खुद को हिंदू बताने वाले नेताओं ने उस समय दंगे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. अरविंद केजरीवाल की जुबान से एक बार भी अंकित शर्मा के हत्यारों के खिलाफ कुछ नहीं निकला.”

उमर खालिद और मास्टरमाइंड का जिक्र

अपने बयान में कपिल मिश्रा ने उमर खालिद का भी नाम लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि खालिद को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं. मिश्रा का स्पष्ट कहना था कि दंगों के कथित मास्टरमाइंड के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती, तब तक पूरा न्याय नहीं माना जाएगा.

क्या था मामला और अदालत का फैसला?

  • घटना: फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या कर शव नाले में फेंक दिया गया था.
  • फैसला: 13 जुलाई 2026 को दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को हत्या, दंगा और धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाने का दोषी ठहराया है.
  • बरी: इस मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से अदालत ने 6 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. साथ ही ताहिर हुसैन पर आपराधिक साजिश के आरोप सिद्ध नहीं हो पाए.

अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर दिल्ली दंगों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. सबकी निगाहें अब दोषियों की सजा के ऐलान पर टिकी हैं.

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