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केतन अग्रवाल हत्याकांड में खुलासा, सिया और चेतन ने 31 मई से पहले ही रच ली थी साजिश


केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाली टाइमलाइन सामने आई है. जांच एजेंसियों के खुलासे के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की योजना 31 मई से पहले ही बना ली थी. दोनों का प्लान लोहगढ़ किले की पहली ट्रिप के दौरान ही वारदात को अंजाम देने का था, लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण उस दिन केवल ‘रेकी’ (जगह का मुआयना) की गई और लोहगढ़ को ही कत्ल के लिए फाइनल किया गया.

पुलिस जांच के अनुसार, 31 मई को केतन और सिया पहली बार लोहगढ़ गए थे. इसी दिन उनका प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली (इंडोनेशिया) जाने का कार्यक्रम भी था, लेकिन सिया इसके लिए तैयार नहीं थी. लोहगढ़ किले की भौगोलिक स्थिति का सही अंदाजा न होने के कारण हत्या का प्लान उस दिन टाल दिया गया.

इसके बाद 3 जून को सिया ने कथित तौर पर मुंबई जाते समय जानबूझकर केतन का पासपोर्ट फाड़कर फेंक दिया. इसके चलते 4 जून को बाली में होने वाला प्री-वेडिंग कार्यक्रम रद्द हो गया. पुलिस का मानना है कि यह सब पूर्व नियोजित साजिश का ही एक हिस्सा था.

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पुणे की पहाड़ी पर किया मर्डर का ‘रिहर्सल’

जांच में जो सबसे खौफनाक बात सामने आई है, वह यह है कि आरोपियों ने हत्या का बाकायदा रिहर्सल किया था:

  • 14 जून: सिया ने केतन पर दोबारा लोहगढ़ जाने का दबाव बनाया. वहां उसने कथित तौर पर केतन को धक्का भी दिया, लेकिन वह बाल-बाल बच गया.
  • 15 से 17 जून के बीच: पहली कोशिश नाकाम होने के बाद सिया और चेतन ने पुणे की ‘एरिया-37’ नामक पहाड़ी पर अभ्यास (Rehearsal) किया. दोनों ने इस बात की कैलकुलेशन की कि केतन को कितनी ताकत से धक्का देना होगा ताकि वह सीधा नीचे खाई में गिरे.

18 जून को दिया खौफनाक वारदात को अंजाम

18 जून को सिया का जन्मदिन था. केतन ने इस मौके पर महाबलेश्वर जाने की पूरी तैयारी कर ली थी. लेकिन, सिया ने एक बार फिर जिद करके केतन को लोहगढ़ चलने के लिए राजी कर लिया. जांच के अनुसार, इसी दौरान सिया ने चेतन की मदद से अपनी खौफनाक योजना को अंजाम दिया और केतन को मौत के घाट उतार दिया.

शुरुआत में सिर्फ घायल करने का था प्लान

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शुरुआत में सिया और चेतन की योजना केतन की हत्या करने की नहीं, बल्कि उसे सिर्फ गंभीर रूप से घायल करने की थी. दोनों के बीच इस बात पर लंबा मंथन हुआ था कि ऐसा कौन-सा तरीका अपनाया जाए जिससे उन पर पुलिस को शक न हो.

दोनों ने केतन को घायल करने के लिए किसी को ‘सुपारी’ देने पर भी विचार किया था. इसके अलावा दुर्घटना (एक्सीडेंट) करवाने, पीटने या लूटपाट के बहाने गंभीर रूप से घायल करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की गई थी. केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस साजिश के कई नए और गहरे पहलू सामने आ रहे हैं, जिससे यह पूरा मामला और भी उलझता और गंभीर होता जा रहा है.

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