समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आजम खान को गिरफ्तार कर लिया. आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के संस्थापक और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं. गिरफ्तारी के बाद उन्हें गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की है. इस मामले की जांच यूपी पुलिस की ओर से जुलाई 2019 में रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. इन एफआईआर में आजम खान और अन्य लोगों पर आरोप था कि रामपुर के सिंगनखेड़ा गांव में किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा कर उसे जौहर यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि किसानों को मारपीट, अवैध हिरासत और धमकी देकर जमीन की बिक्री के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे.
रामपुर में लूट, रंगदारी, धोखाधड़ी और जालसाजी के भी मामले
जांच के दौरान ईडी को पता चला कि सरकारी कामों के लिए जारी धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी में किया गया. सरकारी काम निजी यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए. इसके अलावा सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से रकम वापस ट्रस्ट को दान के रूप में भेजे जाने का भी आरोप है. ईडी की जानकारी के आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को बीएनएस और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत भी एफआईआर दर्ज की गई. इसके अलावा रामपुर में लूट, रंगदारी, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी 28 अन्य एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया.
1,170 करोड़ रुपये की संपत्ति
इस मामले में ईडी ने 28 अक्टूबर को जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था. ये संपत्तियां मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर हैं. ईडी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है.
इससे पहले अगस्त 2026 में ईडी ने यूनिवर्सिटी और रामपुर में उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे. ईडी का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है.
