Middle East Conflict: इजरायल के कारण अमेरिका के सहयोगी देश भी उससे दूर हो रहे हैं. इसमें सबसे नया नाम साउथ कोरिया का है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने पुराने वीडियो शेयर किए हैं. इससे इजरायल भड़क गया है. कोरिया की राष्ट्रपति भी अब पीछे कदम लेने के मूड में नहीं है. साउथ कोरिया हमेशा से फिलिस्तीन को मान्यता नहीं देने वाले बयान से बचता रहा है. साथ ही वोटिंग से दूरी बनाए रखी है.
ऐसे में होर्मुज पर हुई नाकेबंदी कोरिया को चुभ रही है. कोरिया को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. दक्षिण कोरिया दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. अपना ज्यादातर तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आयात करता है. फिलहाल कम से कम 26 कोरियाई टैंकर वहां फंसे हुए हैं. ऐसे में इजराइल-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज बंद होने का खतरा है. यह कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए आपातकाल जैसा है.
इसलिए ली सीजफायर और मानवाधिकारों की अपील कर रहे हैं. ट्रंप को संदेश भी दे रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों कोरिया, यूरोप, जापान को फ्रीराइडिंग कह रहे हैं और युद्ध में सपोर्ट मांग रहे हैं. ली का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को संकेत है कि कोरिया अनचाहे युद्ध में नहीं फंसना चाहता. वे पहले मानवाधिकार वकील थे, इसलिए अन्याय पर बोलने की आदत है.
आखिर क्यों द कोरिया और इजरायल के बीच तनाव गहरा गया है
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोशल मीडिया पर 2024 का एक पुराना वीडियो शेयर किया. इसमें इजरायली सैनिकों को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में एक इमारत की छत से एक शव को नीचे फेंकते दिखाया गया. इस पोस्ट के कारण इजरायल और दक्षिण कोरिया के बीच 60 साल पुराने राजनयिक संबंधों में तल्खी आ गई है और सार्वजनिक तौर पर विवाद छिड़ गया.
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने लिखा कि हमें जांच करनी चाहिए कि यह सच है या नहीं, और अगर है तो क्या कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि युद्धकालीन हत्याएं, होलोकॉस्ट और जापानी उपनिवेश काल में कोरियाई महिलाओं के यौन दासता के बीच कोई फर्क नहीं है. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सितंबर 2024 की वास्तविक घटना है. इसकी अमेरिका ने भी निंदा की थी. उन्होंने जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में इंटरनेशनल कानून का पालन होना चाहिए.
विवाद शुक्रवार को शुरू हुआ. ली ने एक क्लिप पर टिप्पणी की थी. उस क्लिप में इजरायल के सैनिक एक छत से किसी शव को नीचे धकेल रहे हैं. यह फ़ुटेज फिलिस्तीन कार्यकर्ता के अकाउंट से पोस्ट किया गया था. इसके साथ एक कैप्शन भी था. इसमें झूठा दावा किया गया था. दावा था कि यह किसी बच्चे को यातना दिए जाने और उसे एक इमारत से नीचे फेंके जाने का लाइव फ़ुटेज है.
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