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ईरान पर क्या होगा अगला कदम? ट्रंप-नेतन्याहू की सीक्रेट मीटिंग में बना प्लान, जानें


अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक अहम बैठक हुई. बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, बैठक का मकसद अमेरिका पर युद्ध का दबाव बनाना नहीं था, बल्कि कूटनीति, आर्थिक दबाव और सैन्य कार्रवाई जैसे सभी विकल्पों पर विचार करना था.

ईरान से निपटने के तीन विकल्पों पर चर्चा

रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में ईरान को लेकर तीन संभावित रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. पहला विकल्प कूटनीतिक समझौते का था. अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत में जुटे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब भी कई बड़े मतभेद बने हुए हैं. नेतन्याहू ने आशंका जताई कि ईरान ऐसा समझौता नहीं करेगा, जिससे उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर पूरी तरह रोक लग सके.

दूसरा विकल्प ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखते हुए आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करने का था. तीसरा विकल्प यह था कि यदि बातचीत और प्रतिबंध असरदार नहीं होते हैं तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर उसका दायरा बढ़ाया जाए.

बैठक के बाद बढ़ा तनाव

बैठक खत्म होने के कुछ घंटे बाद ही ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर दिया. इसके बाद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी. हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार नेतन्याहू ने ट्रंप पर तत्काल हमला शुरू करने का दबाव नहीं डाला और कहा कि अंतिम फैसला अमेरिका को ही लेना है.

ट्रंप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जताई चिंता

बैठक में सैन्य विकल्पों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा हुई. ट्रंप ने कहा कि लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है. वहीं नेतन्याहू का मानना था कि ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका पर दबाव बनाने के आखिरी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए आर्थिक दबाव और बढ़ाना जरूरी है.

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सीरिया और सऊदी अरब भी चर्चा के केंद्र में

बैठक में सीरिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई. नेतन्याहू ने ट्रंप को एक नक्शा दिखाकर बताया कि तुर्किये का सीरिया के बड़े हिस्से पर प्रभाव है, जबकि इजरायल केवल सीमावर्ती बफर जोन में मौजूद है. उन्होंने कहा कि जब तक जिहादी संगठनों का खतरा रहेगा, तब तक इजरायल दक्षिणी सीरिया के बफर जोन में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा. दोनों नेताओं ने अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते और सऊदी अरब-इजरायल संबंधों के सामान्यीकरण पर भी बातचीत की.

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी

बैठक में नेतन्याहू ने अमेरिका को बताया कि इजरायल अगले 10 वर्षों में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम करना चाहता है. इसके तहत नई रक्षा साझेदारी, मिसाइल रक्षा कार्यक्रम और आधुनिक हथियारों के संयुक्त विकास पर जोर दिया जाएगा. साथ ही इजरायल अपने स्तर पर अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की योजना पर भी काम शुरू कर चुका है, ताकि भविष्य में अमेरिकी F-35 विमानों पर निर्भरता कम की जा सके.

 

 



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