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एजुकेशन सेक्टर में अल्पसंख्यक बच्चों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी, सरकार ने जारी किए आंकड़े


अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी अहम जानकारी मानसून सत्र के दौरान सदन में दी है. उन्होंने कहा है कि पिछले पांच शैक्षणिक सालों के भीतर स्कूलों में अल्पसंख्यक छात्रों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा स्तर पर पहुंची है. संसद में सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि अल्पसंख्यक छात्रों की हिस्सेदारी 5 साल में सबसे ज्यादा बढ़ी है. केंद्र सरकार ने इससे जुड़े आंकड़े भी पेश किए हैं.

सरकार ने पिछले पांच सालों के आंकड़े पेश किए हैं

उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्तर की शिक्षा में 2021-22 में 18 प्रतिशत थी. यह तीन प्रतिशत के साथ बढ़ते हुए 2025 और 26 में 21.8 प्रतिशत पहुंच गई है. इसके अलावा अपर प्राइमरी में साल 2021-22 में 17.8 प्रतिशत थी, जो 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 19.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है. 

वहीं, सेकेंडरी स्तर की एजुकेशन में हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत थी, जो 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 18.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है. वहीं, हायर सेकेंडरी में भागीदारी 15.1प्रतिशत थी, जो बढ़कर 17.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह कुल 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. 

सरकार ने इन आंकड़ों को रखते हुए माना है कि शिक्षा के हर स्तर पर अल्पसंख्यक छात्रों की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी हुई है. यह पिछले पांच सालों का सबसे ऊंचे स्तर पर है. इन आंकड़ों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन समुदायों के स्टूडेंट हैं. 

अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देशों में भारत: रिजिजू

वहीं, इस पूरे मामले पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि भारत अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सबसे सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले देशों में से एक बना हुआ है.  राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की तरफ से आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा है कि अल्पसंख्यक समुदायों ने भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति को आकार देने में अहम रोल अदा किया है. उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की और विकास में सभी अल्पसंख्यक समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है. 

इसके अलावा उन्होंने कहा है कि सरकार 2047 तक विकसित भारत के विजन के तहत बुनियादी ढांचे के विकास और अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. 



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