अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि मौजूदा सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता. उन्होंने कहा कि अगर बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकता है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल दबाव जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो बमबारी भी फिर से शुरू की जा सकती है.
होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर राजी हुआ ईरान
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक अहम वैश्विक शिपिंग रूट, यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है. एरिजोना में Turning Point USA के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह स्ट्रेट अब पूरी तरह खुला है और व्यापार के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा कॉरिडोर में से एक बना हुआ है.
“डील नहीं तो जारी रहेगा सैन्य दबाव”
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “शायद मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन ईरान पर ब्लॉकेड जारी रहेगा. और दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराने शुरू करने पड़ सकते हैं.”
‘न्यूक्लियर डस्ट’ वापस लाने की योजना
अपने भाषण में ट्रंप ने एक विवादित योजना का भी जिक्र किया, जिसमें ईरान में पुराने अमेरिकी हमलों के बाद बचे मलबे, जिसे उन्होंने “न्यूक्लियर डस्ट” कहा, को वापस अमेरिका लाने की बात कही. इसके लिए उन्होंने संयुक्त खुदाई अभियान (जॉइंट ऑपरेशन) का प्रस्ताव दिया.
क्षेत्रीय कूटनीति का दावा, सीजफायर का श्रेय
ट्रंप ने इन घटनाओं को व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि अमेरिका की कोशिशों से क्षेत्र में तनाव कम हुआ है. उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच हुए सीजफायर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि ऐसा समझौता पिछले 78 वर्षों में नहीं हुआ.
पाकिस्तान समेत कई देशों का जताया आभार
ट्रंप ने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि इन देशों ने क्षेत्र में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई है.
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यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा हमला
ट्रंप ने अपने भाषण में यूरोप के सहयोगियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को पारंपरिक साझेदारियों पर कम निर्भर रहना चाहिए. NATO का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जरूरत के समय यह संगठन बेकार साबित हुआ.
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हमने दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाई
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाई है और भविष्य की रणनीति में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा. उन्होंने खुद को एक ग्लोबल डीलमेकर बताते हुए कहा कि वह अब तक कई युद्ध खत्म करवा चुके हैं और आगे यह संख्या और बढ़ सकती है.
