‘परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं’
वियतनाम के वैश्विक मंच पर ‘ट्रेडिशनल इंडिया’ और ‘न्यू-एज ग्लोबल इंडिया’ का बैलेंस साधने के सवाल पर निकिता ने बेहद खूबसूरती से जवाब दिया. निकिता कहती हैं, ‘मिस वर्ल्ड के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना सिर्फ एक सैश (Sash) पहनना नहीं है, बल्कि देश की एक अमर कहानी को दुनिया के सामने लाना है. मैं चाहती हूं कि दुनिया उस भारत को देखे जो अपनी प्राचीन परंपराओं में गहराई से जुड़ा है, लेकिन अपनी प्रगति में उतना ही निडर है. हमारे देश में सदियों पुराना ज्ञान और आधुनिक तकनीक एक साथ चलते हैं. मेरे लिए भारतीय परंपरा और आधुनिकता आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे को पूरा करते हैं.’
‘छोटा शहर नहीं, बड़ी सोच मायने रखती है’
उज्जैन से मिस इंडिया और फिर मिस वर्ल्ड के मंच तक के अपने सफर का जिक्र करते हुए निकिता ने देश के छोटे शहरों की युवा लड़कियों के लिए एक खास मैसेज दिया. उन्होंने कहा, ‘आपका पिन कोड (शहर का नाम) कभी भी आपकी क्षमताओं को तय नहीं कर सकता. आज आपके पास शायद हर साधन या मौका न हो, लेकिन खुद को इतना तैयार रखें कि जब मौका दरवाजे पर दस्तक दे, तो आप पूरी तरह तैयार हों. अपनी सोच को शहर के दायरे में मत बांधिए, क्योंकि दुनिया आपके पते से ज्यादा आपके हुनर में दिलचस्पी रखती है.’
हेक्टिक शेड्यूल में फिटनेस का ‘मंत्र’
मिस वर्ल्ड के बूटकैंप का मतलब होता है, दिन-रात ट्रैवल, बैक-टू-बैक शूट्स और इवेंट्स. इस थका देने वाले रूटीन के बीच निकिता अपनी फिटनेस से कोई समझौता नहीं करतीं. उन्होंने अपना डाइट और वर्कआउट सीक्रेट रिवील किया. निकिता ने कहा, ‘मेरा एक ही नियम है, शरीर को सही पोषण देना. मैं हमेशा प्रोटीन, फल, हरी सब्जियां और भरपूर पानी लेती हूं. फिट रहने के लिए हर बार जिम जाना जरूरी नहीं है. जब भी मौका मिलता है, मैं अपने होटल के कमरे में ही 20 मिनट का एक क्विक सेशन कर लेती हूं, जिसमें बॉडीवेट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और ब्रीदिंग शामिल होता है.’

कैमरे की चकाचौंध और मेंटल प्रेशर से ऐसे निपटती हैं निकिता
लगातार कैमरों की नजरों में रहना और हर सेकंड जज होना मानसिक रूप से काफी थका देने वाला होता है. जब ओवरथिंकिंग या एंग्जायटी हावी होती है, तो निकिता का ‘5-मिनट माइंडफुलनेस हैक’ काम आता है. उन्होंने कहा, ‘मैं खुद को याद दिलाती हूं कि मैंने यह सफर क्यों शुरू किया था. जैसे ही आप अपना ध्यान दबाव से हटाकर अपने ‘उद्देश्य’ पर लगाते हैं, मानसिक तनाव खत्म हो जाता है.’
‘मंच साबित करने के लिए नहीं, जुड़ने के लिए होता है’
जब निकिता से पूछा गया कि थिएटर की समझ इस हाई-प्रेशर माहौल में कैसे मदद कर रही है, तो उन्होंने बताया, ‘थिएटर मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है. इसने मुझे सिखाया कि स्टेज खुद को साबित करने की जगह नहीं है, बल्कि लोगों से दिल का रिश्ता जोड़ने का जरिया है. इसने मुझे ध्यान से सुनना और ईमानदारी से अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करना सिखाया. मिस वर्ल्ड में यह सीख सबसे ज्यादा काम आ रही है, क्योंकि लोग आपकी बातें भूल सकते हैं, लेकिन वो यह कभी नहीं भूलते कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया.’

‘माटी’ प्रोजेक्ट के बारे में क्या बोलीं निकिता?
मिस वर्ल्ड के सबसे खास ‘ब्यूटी विद अ पर्पस’ (BWAP) राउंड के लिए निकिता का प्रोजेक्ट ‘माटी’ आदिवासी महिलाओं और बच्चों के सशक्तीकरण पर काम कर रहा है. निकिता का कहना है कि भारत के आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति और जंगलों को तब से संभालकर रखा है, जब इस पर बातें भी शुरू नहीं हुई थीं. उन्होंने कहा, ‘मैं दुनिया को आदिवासी समुदाय की गरिमा और उनके संघर्ष से रूबरू कराना चाहती हूं. वो किसी की मदद का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वो बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के हकदार हैं. ‘माटी’ का मकसद उनके लिए बोलना नहीं, बल्कि दुनिया को उनकी बात सुनने के लिए मजबूर करना है.’
8 साल की उम्र में लिखी पहली किताब
8 साल की उम्र में पहली किताब लिखने वाली निकिता पोरवाल आज राइटिंग, म्यूजिक, थिएटर, फैशन और सिनेमा जैसे कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने कहा, ‘ये सभी कलाएं मेरे लिए कहानियां सुनाने के अलग-अलग तरीके हैं. ये मुझे भटकाती नहीं, बल्कि मुझे मानसिक रूप से संतुलित रखती हैं. लेकिन अगर मुझे इनमें से किसी एक को चुनना हो, तो थिएटर ही मेरा सबसे बड़ा स्ट्रेस बस्टर है. जैसे ही मैं रंगमंच पर कदम रखती हूं, दुनिया की सारी उलझनों से दूर एकदम शांति महसूस करती हूं.’

फैंस को निकिता से बड़ी उम्मीदें
निकिता पोरवाल अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर मिस वर्ल्ड के मंच तक पहुंची हैं. वो सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं. अब हर किसी की नजरें मिस वर्ल्ड के इस मंच पर टिकी हैं. फैंस को उम्मीद है कि भारत की यह होनहार बेटी देश का नाम रोशन करेगी.
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