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‘उम्मीद नहीं थी जिंदा लौटेंगे’, नेपाल से नागपुर लौटे पर्यटकों ने सुनाई आपबीती


नेपाल में कुदरत का कहर कुछ लोगों पर भारी पड़ा तो कुछ खुशकिस्मत लोग इस कहर से बच गए. इस बीच नेपाल में फंसे 106 टूरिस्ट में से चार सुरक्षित नागपुर लौट गए हैं. लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे जिंदा वापस लौटेंगे.

सुरक्षित लौटे इन लोगों ने मुसीबत के समय में मदद के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्थानीय प्रशासन और नेपाल में भारत के राजदूत को धन्यवाद दिया. टूरिस्ट ने बताया कि आपदा के कारण रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे वे फंस गए थे.

नागरिकों में से एक ने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा वापस लौटेंगे. हमारे पास कुछ दस्तावेज नहीं थे, लेकिन प्रशासन ने बहुत मदद की. उन्होंने तुरंत हमारे डॉक्यूमेंट्स बनाकर दे दिए. फिर हम फ्लाइट से दिल्ली आए और वहां से फिर नागपुर पहुंचे. प्रशासन ने मुसीबत में हमारी मदद की है, इसलिए उनका धन्यवाद.”

‘कुछ नहीं आ रहा था नजर’

पर्यटकों ने आगे कहा कि जब ये घटना घटी तो हमें कुछ मालूम नहीं हुआ, क्योंकि हम अंदर की तरफ थे. हमें कुछ नजर नहीं आ रहा था. हम कुल मिलाकर 106 लोग थे. हमारा 10 दिनों का सफर था. बीच में आने-जाने के दो दिन थे और रुकने के आठ दिन.

एक अन्य नागरिक ने कहा कि हमारे जो रिश्तेदार हैं, वो सभी सुरक्षित तरीके से यहां आ गए और वो बहुत महत्वपूर्ण है. इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्थानीय लोगों ने काफी मदद की. हमने फ्लाइट की टिकट भी यहीं से की थी.

‘पैरों तले खिसक गई थी जमीन’

दीपक पांडेय ने कहा कि हम सात-आठ दिन अच्छे से रहे. हमें पुलिस वालों ने फिर आगे रोक दिया. आपदा आ गई थी, रास्ते खराब हो गए और पुल नष्ट हो गए. हमारे पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी. हमारे साथ एक मरीज भी था, उसे इमरजेंसी में वापस लाना था, फिर लोगों ने टिकट बुक करने में हमारी मदद की और हमें हिम्मत दिया कि सब ठीक है. नेपाल में भारत के राजदूत ने हमारी मदद की. पहले ऐसा लग रहा था कि बस घर पहुंच जाएं. हम सरकार को भी धन्यवाद करेंगे.

‘सीएम फडणवीस से बात कर मिली हिम्मत’

वर्षा उपाध्याय ने कहा कि नेपाल में हम पोखरा गए थे और दो दिन रुककर वहां से काठमांडू गए. काठमांडू में चार-पांच दिन रुकने के बाद ये घटना घटी और फिर ऐसा हुआ कि हम डर गए. जब मुख्यमंत्री से हमारी बात हो गई तो हिम्मत आ गई और हम डरे नहीं. उनकी हिम्मत से हमें भी थोड़ा आराम मिला.



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