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एक तरफ BRICS की तैयारी, दूसरी तरफ US संग साझा युद्धाभ्यास का आगाज


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  • इस बार यह सबसे बड़ा होगा, उन्नत हथियार शामिल।

एक तरफ 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए पूरी दिल्ली पलके बिछाए बैठी है, तो दूसरी तरफ यूएस आर्मी के कदम भी भारत में पड़ चुके हैं. यह मौका भारत और अमेरिकी सेनाओं के बीच होनी वाली सालाना ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज, युद्ध-अभ्यास (यही नाम है एक्सरसाइज का) का है. गुरुवार (10 सितंबर) से शुरू होने वाली एक्सरसाइज 23 सितंबर तक उत्तराखंड और राजस्थान के थार रेगिस्तान में होने जा रही है, यानी भारत की कूटनीति और मिलिट्री डिप्लोमेसी साथ-साथ चल रही है.

युद्धाभ्यास के लिए US आर्मी ने जारी किया बयान

अमेरिका के अलास्का से यूएस आर्मी ने गुरुवार (10 सितंबर) को युद्धाभ्यास के लिए आधिकारिक बयान जारी किया. बयान में यूएस आर्मी (पैसिफिक) के डिप्टी कमांडिंग जनरल जेवी वोवेल के हवाले से कहा गया, ‘युद्ध अभ्यास का मकसद भरोसा बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफ़िक के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाना है. हर साल भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी मजबूत होती जा रही है और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं.’

वोवेल खुद भारत और अमेरिका के बीच होने वाली एक्सरसाइज के 22वें संस्करण की समीक्षा करने के लिए भारत आ रहे हैं. इसके अलावा, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के भी एक्सरसाइज के अंतिम चरण में हिस्सा लेने की पूरी संभावना है. गोर ने भी बयान जारी कर कहा कि युद्धाभ्यास से पता चलता है कि भारत और अमेरिकी की पार्टनरशिप कितनी मजबूत हो रही है.

2004 से जारी है भारत-यूएस का साझा युद्धाभ्यास

अमेरिका दूतावास के मुताबिक, साल 2004 से भारतीय सेना के साथ यूएस आर्मी (पैसिफिक) द्वारा आयोजित द्विपक्षीय अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ (यही नाम है साझा युद्धाभ्यास का) ने संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता (इंटर-ऑपरेबिलिटी) को बढ़ाता है और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के समर्थन में भारत और अमेरिका की प्रमुख रक्षा साझेदारी को मजबूत किया है.

US संग युद्धाभ्यास और BRICS समिट भारत में पहली बार एक साथ

आजाद भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि कूटनीति के तौर पर दुनिया के दो-तीन बेड़े खेमों के साथ भारत की जुगलबंदी अपने धरती पर चल रही है. एक तरफ अमेरिका है, तो दूसरी तरफ रूस, चीन और ईरान है. अमेरिका का ईरान के साथ पिछले छह महीने से युद्ध चल रहा है. जबकि, ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान खुद ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली दौरा शुरू हो रहा है. युद्ध-अभ्यास एक्सरसाइज को भारत अपनी सफल मिलिट्री-डिप्लोमेसी का हिस्सा मानता आया है.

ट्रंप को पसंद नहीं है ब्रिक्स समिट

उल्लेखनीय है कि ट्रंप को भारत की रूस और चीन से ब्रिक्स की जुगलबंदी कतई पसंद नहीं है. ट्रंप को ऐसा लगता है कि ब्रिक्स के जरिए चीन और रूस, दुनियाभर में डि-डॉलरराइजेशन की जुगत में है यानी अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं.

भारत और यूएस आर्मी का ये साझा युद्धाभ्यास, एक वर्ष भारत में होता है और एक वर्ष अमेरिका में. पिछले साल अलास्का में युद्ध-अभ्यास के 21वें संस्करण को आयोजित किया गया था. 20वां संस्करण, राजस्थान के थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया था, जिसमें भारतीय सेना की मद्रास रेजीमेंट के 400 सैनिकों ने हिस्सा लिया था.

अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री अभ्यास

माना जा रहा है कि इस बार की मिलिट्री एक्सरसाइज अब तक की सबसे बड़ी होने जा रही है. इस साल, 22वां संस्करण है और इसी महीने (सितंबर में) होने जा रहा है. इस बार का युद्धाभ्यास उत्तराखंड के ओली (जोशीमठ) और राजस्थान में आयोजित किया जाएगा. हालांकि, पिछले कई संस्करण, या तो उत्तराखंड में आयोजित किए गए या फिर थार रेगिस्तान में. भारतीय सेना की तरफ से युद्ध-अभ्यास के लिए अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है.

जानकारी के मुताबिक, इस बार की साझा एक्सरसाइज अब तक के सभी संस्करणों से बड़े होने जा रही है. यूएस आर्मी की अलास्का स्थित 11वीं एयरबोर्न डिवीजन (हेडक्वार्टर फोर्ट वेनराइट) और थर्ड मल्टी डोमेन टास्क फोर्स (3एमडीटीएफ) युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत आई है.

युद्धाभ्यास में किन-किन हथियारों का होगा इस्तेमाल

पहली बार यूएस आर्मी, इस एक्सरसाइज के लिए अपने लंबे दूरी तक मार करने वाले रॉकेट सिस्टम को लेकर भारत आ रही है. ऐसे में भारतीय सेना के पिनाका और दूसरे लंबी दूरी की मार करने वाले फायरिंग के साथ इंटीग्रेटेड फायरिंग का अभ्यास भी एक्सरसाइज में किया जाएगा. ड्रोन इंटीग्रेशन (मोबाइल, स्लो, स्मॉल अनमैंड एयरक्राफ्ट) भी इस साल होने वाली एक्सरसाइज का आकर्षण हो सकता है.

पटरी पर लौट रहे भारत-अमेरिका के संबंध

युद्ध-अभ्यास एक्सरसाइज ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और अमेरिका के संबंध एक बार फिर पटरी पर आते दिखाई दे रहे हैं. पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारतीय सेना को 100 जैवलिन मिसाइल देने का ऐलान किया था. उससे पहले रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका की जनरल एटॉमिक कंपनी से दो (02) एमक्यू-9 सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लेने के लिए करार किया था.

ये दोनों ड्रोन हिंद महासागर की निगरानी के लिए भारतीय नौसेना ऑपरेट करेगी. इसके अलावा, इसी हफ्ते अमेरिका से एलसीए-तेजस प्रोजेक्ट के लिए एफ-404 एविएशन इंजन की सप्लाई भी फिर से शुरू हो गई है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास आ गई थी. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने को लेकर संबंधों में कड़वाहट आ गई थी. भारत का दावा है कि पाकिस्तानी डीजीएमओ के गिड़गिड़ाने के बाद ऑपरेशन सिंदूर को रोका गया था और सीजफायर के लिए भारत तैयार हुआ था. 

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