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कर्मचारियों की सैलेरी से लेकर स्कूलों की मनमानी फीस तक, पंजाब विधानसभा में कई बिल पास


पंजाब विधानसभा में कई अहम विधेयक पास होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इनसे जुड़े प्रावधानों और सरकार के फैसलों को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को अनुबंध में लेने के साथ उनके वेतन से जुड़े अंतर को खत्म करने की कोशिश कर रही है. इसके अलावा निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर रोक लगाने, पुराने पेड़ों को बचाने और जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को व्यवस्था में शामिल करने की बात कही.

भगवंत मान ने कहा, “जो कर्मचारी पहले से काम कर रहे थे, सरकार अब उनको अनुबंध में ले रही है और उनके वेतन में जो अंतर था, उसे पूरा किया जा रहा है.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कई बार कागजों में कर्मचारियों का वेतन ज्यादा होता था, लेकिन वास्तविकता में उन्हें कम पैसा मिलता था. ऐसे में कर्मचारियों पर नौकरी जाने का डर बना रहता था.

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उन्होंने कहा, “कई बार होता था कि जो कागजों में वेतन है, वो ज्यादा है लेकिन मिलती वास्तविकता में जो कम है, तो उन पर तलवार लटकती थी कि बिना किसी सूचना के कभी भी निकाल देते थे. तो ये जो बिचौला व्यवस्था है, वो खत्म करेंगे.”

उन्होंने बताया कि फिलहाल अग्निशमन विभाग, उच्च वोल्टेज बिजली की शिकायत और सफाई जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इसमें शामिल किया गया है. धीरे-धीरे बाकी लोगों को भी इस व्यवस्था में लाने की बात कही.

निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर रोक

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर पास किए गए विधेयक को भी अहम बताया. उन्होंने कहा कि पंजाब में 7800 से ज्यादा निजी स्कूल हैं और करीब 32 लाख बच्चे इनमें पढ़ते हैं. अब स्कूल हर साल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. विधेयक में बताया गया है कि 5% से ज्यादा प्रति वर्ष फीस नहीं बढ़ा सकते.

मान ने बताया कि पिछले तीन साल का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा. अगर किसी स्कूल ने तय सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाई है तो उसे अतिरिक्त रकम अभिभावकों को वापस करनी होगी.

उन्होंने कहा, “फीस की भी परिभाषा दी गई है. फीस का मतलब है, जो अनिवार्य पैसे अभिभावकों से लिए जाते हैं. कोई भवन शुल्क के नाम पर ले लेते हैं, कुछ शैक्षणिक यात्रा के नाम पर ले लेते हैं. कोई परिवहन शुल्क हो गई. मतलब ऐसी बहुत सी फीस ट्यूशन फीस के बिना बना रखी है. तो जो भी पैसा अभिभावकों को देना पड़ता है, हम उसको फीस मानेंगे.”

उन्होंने कहा कि इससे आम अभिभावकों को फायदा होगा, क्योंकि निजी स्कूलों की पढ़ाई का खर्च लगातार उनकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है.

‘पढ़ाई को इतना बड़ा व्यापार न बनाया जाए’

निजी स्कूलों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी के खिलाफ नहीं है, लेकिन शिक्षा को सिर्फ व्यापार नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने कहा था कि जो शिक्षा है, वो शेरनी के दूध जैसी है. जो भी उसको एक बार पी लेगा, वो दहाड़ेगा.

मान ने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना जरूरी है और स्कूलों की फीस इतनी नहीं होनी चाहिए कि शिक्षा आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाए.

70 से 100 साल पुराने पेड़ों की कटाई पर रोक

विधानसभा में पेड़ों को बचाने से जुड़ा विधेयक भी पास हुआ है. मुख्यमंत्री ने बताया कि खासतौर पर 70, 80 और 100 साल पुराने पेड़ों को काटने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है. इसके लिए एक समिति भी बनाई गई है. उन्होंने कहा, “एक पेड़ों का विधेयक है, जिसमें प्रस्ताव है कि जो 70 साल, 80 साल, 100 साल पुराने पेड़ हैं, उनके काटने पर हम पाबंदी लगा रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि सड़क या कॉलोनी बनाने के लिए पेड़ों को काटने के बजाय जरूरत पड़ने पर परियोजना का रास्ता थोड़ा बदला जा सकता है, क्योंकि पर्यावरण को बचाना जरूरी है.

महिला आरक्षण पर भगवंत मान ने उठाए सवाल

आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के समर्थन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में राजनीति हो रही है. महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की बात हो रही है तो इसे इसी सदन में क्यों नहीं लागू किया जाता. उन्होंने कहा कि इसमें कुछ ना कुछ झोल लगता है, तो इस पर बहस होनी चाहिए. पहले प्रवर समिति के पास चला जाना चाहिए.

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31 साल से जेल में बंद व्यक्ति को पैरोल की सिफारिश

भगवंत मान ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर 31 साल से जेल में बंद एक व्यक्ति को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि उसकी मां बहुत बीमार हैं और बेहोशी की हालत में हैं.



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