नेपाल में त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो कर्मचारियों को 9 दिन बाद जिंदा बाहर निकालना बचाव दल के लिए बड़ी सफलता है. सुरंग बचाव के जाने-माने विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने इस पूरे ऑपरेशन को असाधारण बताया है. डिक्स वही विशेषज्ञ हैं, जो 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के अभियान से भारत में चर्चा में आए थे.
डिक्स इस समय नेपाल में चल रहे बचाव अभियान में मार्गदर्शन दे रहे हैं. उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि दो लोगों को इतने कठिन हालात में जिंदा बाहर निकालना बचाव दल के लिए बड़ी जीत है. उनके मुताबिक, इस तरह की स्थिति से दुनिया में पहले इस स्तर पर सामना नहीं हुआ है.
बाढ़ के बाद सुरंग में फंसे थे कर्मचारी
त्रिशूली नदी के इलाके में आई भीषण बाढ़ ने कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. बाढ़ के बाद कई कर्मचारी लापता हो गए थे. त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में भी बड़ी मात्रा में पत्थर और कीचड़ भर गया था, जिससे अंदर जाने का रास्ता बंद हो गया. बचाव दल ने कई दिनों तक मशीनों की मदद से मलबा हटाया. सुरंग के अंदर हवा पहुंचाने के लिए पाइप डाले गए और यह कोशिश भी की गई कि अंदर की हवा खराब न हो. बचावकर्मी लगातार इस उम्मीद में काम करते रहे कि सुरंग के भीतर कोई व्यक्ति जिंदा हो सकता है.
कार जितनी बड़ी चट्टानों ने बढ़ाई मुश्किल
अर्नोल्ड डिक्स ने बताया कि इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती भारी चट्टानों और मलबे को हटाना थी. उन्होंने कहा कि कुछ चट्टानें इतनी बड़ी थीं कि उन्हें हटाने के लिए विशेष तरीके अपनाने पड़े. सुरंग बचाव के किसी अभियान में इस तरह की स्थिति बेहद मुश्किल मानी जाती है. डिक्स के अनुसार, बचाव दल ने सुरंग के उन हिस्सों की पहचान की, जहां लोग बाढ़ और मलबे के बावजूद सुरक्षित रह सकते थे. दो कर्मचारियों के जिंदा मिलने के बाद इन जगहों को लेकर बचाव दल का भरोसा और बढ़ा है.
दो लोगों के मिलने से बाकी मजदूरों की उम्मीद बढ़ी
बचाए गए दोनों कर्मचारी करीब 10 दिन तक बिना बिजली और रोशनी के सुरंग के अंदर रहे. इस दौरान उन्होंने वहां उपलब्ध पानी और खाने की मदद से खुद को जिंदा रखा. डिक्स का कहना है कि ऐसे हालात में किसी व्यक्ति की जिंदा रहने की इच्छा भी बहुत महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह साफ नहीं था कि सुरंग के अंदर फंसे लोगों के पास खाने और पानी की कितनी व्यवस्था है. अंदर पूरी तरह अंधेरा था और बिजली भी उपलब्ध नहीं थी. इसके बावजूद दो लोगों का जीवित मिलना इस बात का सबूत है कि सुरंग के कुछ हिस्सों में लोग कठिन परिस्थितियों में भी बच सकते हैं.
अब भी कई लोगों की तलाश जारी
दो कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकालने के बाद बचाव दल की उम्मीद बढ़ गई है. जानकारी के मुताबिक, त्रिशूली-3ए की सुरंग में अभी भी कई अन्य कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है. बचावकर्मी मलबा हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. त्रिशूली नदी घाटी की दूसरी जलविद्युत परियोजनाओं में भी कई कर्मचारी लापता बताए गए हैं. अलग-अलग जगहों पर बचाव अभियान चल रहा है. ऐसे में त्रिशूली-3ए से दो लोगों का जिंदा निकलना परिवारों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आया है. डिक्स के मुताबिक, इस अभियान से यह भरोसा बढ़ा है कि सुरंग के कुछ सुरक्षित हिस्सों में लोग लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, इसलिए बचाव दल अब बाकी लापता लोगों की तलाश और ज्यादा उम्मीद के साथ कर रहा है.
