- टीसीएस इस वित्तीय वर्ष में 25,000 फ्रेशर्स की भर्ती करेगी.
- पिछले साल 44,000 नए ग्रेजुएट्स को टीसीएस ने नौकरी दी थी.
- छंटनी का सीधा संबंध एआई से नहीं, प्रोजेक्ट तरीके में बदलाव से था.
- कंपनी फ्रेशर्स को ट्रेनिंग देकर अपनी जरूरत के अनुसार तैयार करती है.
लोग परेशान हैं कहीं AI उनकी जॉब ना खा जाए. लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर टीसीएस की तरफ से सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार संस्थान में इस वित्तीय साल में 25 हजार पदों पर भर्ती की जाएगी. ये नौकरियां फ्रेशर को मिलेंगी. आइए डिटेल्स जानते हैं…
कंपनी के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक K Krithivasan का कहना है कि टीसीएस लगातार युवाओं को मौका देने की नीति पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 44,000 नए ग्रेजुएट को नौकरी दी थी. यह किसी भी निजी कंपनी द्वारा एक साल में की गई सबसे बड़ी भर्ती में से एक है. उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से टीसीएस हर साल 40,000 से अधिक फ्रेशर्स को मौका देती आ रही है. इस बार 25,000 फ्रेशर्स को ऑफर दिया गया है और कंपनी और लोगों को भी जोड़ सकती है.
छंटनी पर क्या कहा?
पिछले वित्त वर्ष में करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की खबरों ने काफी चर्चा पैदा की थी. इस पर कृतिवासन ने कहा कि अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कंपनी में लंबे समय तक करियर के अवसर बने रहते हैं. उन्होंने साफ किया कि इस छंटनी का सीधा संबंध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से नहीं था. उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट को करने के तरीके में बदलाव हुआ है, जिससे वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों की जरूरत कम हुई.
फ्रेशर्स को क्यों मिलता है खास मौका?
टीसीएस का मानना है कि नए युवाओं को शुरुआत से तैयार करना ज्यादा बेहतर होता है. कंपनी में शामिल होने के बाद फ्रेशर्स को करीब नौ महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है. इस दौरान उन्हें तकनीक, प्रोजेक्ट और टीम वर्क के बारे में सिखाया जाता है. इसके बाद ही उन्हें किसी प्रोजेक्ट से जोड़ा जाता है. कृतिवासन ने यह भी साफ किया कि फिलहाल अनुभवी कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने की कोई खास योजना नहीं है. अनुभवी लोग तुरंत काम शुरू कर सकते हैं, लेकिन फ्रेशर्स को ट्रेनिंग देकर कंपनी अपने हिसाब से तैयार करती है.
कारोबार की स्थिति कैसी है?
कंपनी के अनुसार, मौजूदा वैश्विक हालात के बावजूद टीसीएस के पास प्रोजेक्ट की पाइपलाइन स्थिर है. यह आईटी सेक्टर के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है. नए प्रोजेक्ट अलग-अलग देशों और क्षेत्रों से आ रहे हैं. इनमें लागत कम करने और डिजिटल बदलाव से जुड़े काम ज्यादा हैं.
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