- सरकार को E20 से इंजन खराबी की शिकायतें नहीं मिलीं।
संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार (29 जुलाई, 2026) को राज्यसभा में विपक्षी पार्टी सीपीआई (एम) ने E20 ईंधन से मोटर वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा. केरल से सीपीआई(एम) सांसद एए रहीम ने पूछा कि E20 के इस्तेमाल से गाड़ी के इंजन, मेंटेनेंस, गाड़ी की परफॉर्मेंस पर क्या फर्क आता है? क्या सरकार ने इसका कोई एसेसमेंट किया है? इसके अलावा, क्या सरकार के पास कोई ऐसी शिकायत आई है और अगर आई है तो इसको लेकर सरकार ने क्या एक्शन लिया है?
विपक्ष के सवालों पर नितिन गडकरी ने दिया जवाब
विपक्षी सांसद के सवाल पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक अध्ययन, परीक्षण और विभिन्न हितधारकों से परामर्श किया गया. E20 पर विस्तृत अध्ययन इंडियन ऑयल (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया.
उन्होंने कहा कि अध्ययन में पाया गया कि BS-VI मानक वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों में E20 के उपयोग से उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप रहा और इंजन में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं पड़ी. परीक्षणों के अनुसार पुराने (Legacy) वाहनों में भी प्रदर्शन, ड्राइवेबिलिटी, स्टार्टेबिलिटी, धातु एवं प्लास्टिक की अनुकूलता तथा इंजन के घिसाव में कोई महत्वपूर्ण समस्या नहीं पाई गई.
वाहना का माइलेज किन-किन चीजों पर करता है निर्भर?
हालांकि, मंत्री ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल, 2005 से लागू BS-III मानक वाले और वर्ष 2016 से पहले निर्मित कुछ वाहनों में रबर के कुछ पुर्जों और गैस्केट को नियमित सर्विसिंग के दौरान बदलने की आवश्यकता हो सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग शैली, समय पर सर्विसिंग, इंजन ऑयल, एयर फिल्टर, टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कई कारक भी इसे प्रभावित करते हैं.
उन्होंने बताया कि नीति आयोग के तहत 26 दिसंबर 2020 को गठित अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) ने वाहन अनुकूलता, माइलेज, इंजन कैलिब्रेशन, ईंधन प्रणाली, टिकाऊपन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता का व्यापक अध्ययन किया. समिति की ‘रोडमैप फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020–25’ रिपोर्ट जून 2021 में जारी की गई, जिसे ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया गया. E20 लागू करने से पहले इसी रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया गया.
भारत में कैसे हुई एथेनॉल की शुरुआत?
मंत्री ने आगे कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (EBP) को चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और परामर्श आधारित तरीके से लागू किया गया है. भारत में EBP कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी. E5 वर्ष 2006 में शुरू हुआ और एथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे बढ़ाकर दिसंबर 2025 में 20% (E20) तक पहुंचाया गया.
देश में एथेनॉल मिश्रण की प्रगति
2013-14: लगभग 1.53%
2020-21: लगभग 8.1%
2021-22: 10%
2022-23: 12%
2023-24: 14.6%
2024-25: 19.2%
दिसंबर 2025: 20% (E20)
शिकायतों पर सरकार का जवाब
सरकार ने बताया कि SIAM के अनुसार, E20 के कारण इंजन फेल होने या वाहनों के बड़े पैमाने पर खराब होने की कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है. इंजन प्रदर्शन, माइलेज और वाहन के घिसाव से जुड़े कुछ मुद्दे मुख्यतः सार्वजनिक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर उठाए गए हैं.
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