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गांव में भैंस चराने से लेकर IAS बनने तक, जानें वनमती के संघर्ष की कहानी


वनमती के पिता टैक्सी ड्राइवर थे और पिता की आमदनी सीमित थी. ऐसे माहौल में उनका पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था. कक्षा 12वीं के दौरान रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की ओर से उनकी शादी का भी दबाव बनने लगा था. जिस माहौल में लड़कियों की पढ़ाई के बाद जल्दी शादी को सामान्य बात माना जाता था, वहां वनमती ने शादी के बजाय अपनी पढ़ाई को पूरी करने का फैसला लिया. उनके माता-पिता ने भी उनके इस फैसले का समर्थन किया.

वनमती के मन में सिविल सेवा में जाने का विचार स्कूल के दिनों में ही आ गया था. बताया जाता है कि उन्होंने एक टीवी सीरियल देखा था, जिसमें एक महिला IAS अधिकारी का किरदार था. उस किरदार की जिम्मेदारियां और काम ने उन्हें प्रभावित किया और उनके मन में भी प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा बन गई.

वनमती के मन में सिविल सेवा में जाने का विचार स्कूल के दिनों में ही आ गया था. बताया जाता है कि उन्होंने एक टीवी सीरियल देखा था, जिसमें एक महिला IAS अधिकारी का किरदार था. उस किरदार की जिम्मेदारियां और काम ने उन्हें प्रभावित किया और उनके मन में भी प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा बन गई.

इसके बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. स्कूल के बाद बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन में ग्रेजुएशन किया और फिर मास्टर्स ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन की पढ़ाई पूरी की. पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी.

इसके बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. स्कूल के बाद बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन में ग्रेजुएशन किया और फिर मास्टर्स ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन की पढ़ाई पूरी की. पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी.

हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वनमती ने अपनी तैयारी के साथ काम भी किया. उन्होंने बैंक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद इंडियन ओवरसीज बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर काम किया. नौकरी से उन्हें आर्थिक सहारा मिला, लेकिन उनका टारगेट अभी भी सिविल सेवा में जाना ही था.

हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वनमती ने अपनी तैयारी के साथ काम भी किया. उन्होंने बैंक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद इंडियन ओवरसीज बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर काम किया. नौकरी से उन्हें आर्थिक सहारा मिला, लेकिन उनका टारगेट अभी भी सिविल सेवा में जाना ही था.

UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा. पहली कोशिश में वह इंटरव्यू तक पहुंची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. इसके बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और अलग-अलग प्रयासों में परीक्षा के अलग-अलग चरणों में उन्हें सफलता नहीं मिली.

UPSC की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा. पहली कोशिश में वह इंटरव्यू तक पहुंची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. इसके बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और अलग-अलग प्रयासों में परीक्षा के अलग-अलग चरणों में उन्हें सफलता नहीं मिली.

UPSC की तैयारी के दौरान एक मुश्किल दौर तब उनके जीवन में तब आया, जब उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए. जिस समय वनमती सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू की तैयारी कर रही थी, उसी दौरान पिता को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

UPSC की तैयारी के दौरान एक मुश्किल दौर तब उनके जीवन में तब आया, जब उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए. जिस समय वनमती सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू की तैयारी कर रही थी, उसी दौरान पिता को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

इसके बाद एक तरफ उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ परीक्षा का अंतिम चरण. इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इंटरव्यू में शामिल हुई. वहीं लगातार कोशिशों के बाद वनमती ने आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2014 में ऑल इंडिया रैंक 152 हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुई. इसके बाद में वह महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी बनी.

इसके बाद एक तरफ उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ परीक्षा का अंतिम चरण. इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इंटरव्यू में शामिल हुई. वहीं लगातार कोशिशों के बाद वनमती ने आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2014 में ऑल इंडिया रैंक 152 हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुई. इसके बाद में वह महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी बनी.

IAS बनने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली. उनके काम में आदिवासी कल्याण, ग्रामीण विकास, शिक्षा- स्वास्थ्य-जल संरक्षण और प्रशासनिक सुधार जैसे क्षेत्र शामिल रहे.  नंदुरबार में उन्होंने आश्रम स्कूलों में पोषण से जुड़े कामों और छात्रों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया. वहीं धुले जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ कोविड-19 के दौरान प्रशासनिक कामों में भी उन्होंने भूमिका निभाई.

IAS बनने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली. उनके काम में आदिवासी कल्याण, ग्रामीण विकास, शिक्षा- स्वास्थ्य-जल संरक्षण और प्रशासनिक सुधार जैसे क्षेत्र शामिल रहे.  नंदुरबार में उन्होंने आश्रम स्कूलों में पोषण से जुड़े कामों और छात्रों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया. वहीं धुले जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ कोविड-19 के दौरान प्रशासनिक कामों में भी उन्होंने भूमिका निभाई.

वनमती अब महाराष्ट्र के वर्धा की जिला कलेक्टर के तौर पर काम कर रही है. यहां उनका फोकस जल संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और रोजगार से जुड़े प्रयासों पर रहा है. उनके डिजिटल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को विकास कार्यों में पारदर्शिता और दोहराव रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, जिससे महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी सराहा गया.

वनमती अब महाराष्ट्र के वर्धा की जिला कलेक्टर के तौर पर काम कर रही है. यहां उनका फोकस जल संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और रोजगार से जुड़े प्रयासों पर रहा है. उनके डिजिटल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को विकास कार्यों में पारदर्शिता और दोहराव रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, जिससे महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी सराहा गया.

Published at : 25 Sep 2026 08:49 AM (IST)

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