Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विस्तृत सफाई जारी करते हुए साफ किया कि यह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक रूप से बेहद अहम है. सरकार ने कहा कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों के हित के बीच संतुलन बनाते हुए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है.
सरकार की सफाई, FAQ के जरिए दिया जवाब
सरकार ने यह स्पष्टीकरण FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) के रूप में जारी किया. यह कदम उस समय आया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस 81,000 करोड़ रुपये की परियोजना पर सवाल उठाते हुए इसे पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के लिए खतरा बताया था. सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह परियोजना पूरी जांच-पड़ताल और सोच-समझकर शुरू की गई है.
अंडमान सागर में बढ़ेगी भारत की ताकत
सरकार के मुताबिक, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत होगी. इससे देश की समुद्री और रक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा. साथ ही यह द्वीप वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जुड़ेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. इस परियोजना के तहत एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाने की भी योजना है.
पर्यावरण पर असर का पूरा आकलन
सरकार ने स्पष्ट किया कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की पहचान कर ली गई है और उनका विस्तृत आकलन किया गया है. इन प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए मजबूत पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके.
आदिवासी समुदायों की सुरक्षा सबसे ऊपर
सरकार ने जोर देकर कहा कि इस परियोजना में आदिवासी समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है. सभी कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों का पालन किया गया है. जारवा पॉलिसी 2004 और शोम्पेन पॉलिसी 2015 के तहत विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों से सलाह ली गई है. एम्पावर्ड कमेटी ने यह सुनिश्चित किया है कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) पर इस परियोजना का कोई नकारात्मक असर न पड़े. सरकार ने यह भी बताया कि परियोजना को जनजातीय कार्य मंत्रालय से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ मिल चुका है. इसके साथ ही वन अधिकार अधिनियम 2006 का भी पूरी तरह पालन किया गया है.
