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अशोक खरात मामले में ED का एक्शन, रूपाली चाकणकर की बहन-भतीजे को नोटिस, 70 करोड़ के घोस्ट अकाउंट नेटवर्क का खुलासा


प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज कर दी है. इसी सिलसिले में एजेंसी ने NCP नेता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर और उनके बेटे तन्मय को पूछताछ के लिए अगले सप्ताह तलब किया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

जांच में समता नागरी सहकारी पतसंस्था (क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी) में चार ऐसे बैंक अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिनमें पिछले कुछ वर्षों में 1.20 करोड़ से 2.40 करोड़ रुपये के बीच लेनदेन हुआ. सूत्रों का दावा है कि ये अकाउंट्स सीधे तौर पर अशोक खरात से जुड़े हैं. खरात पर आरोप है कि वह 134 से अधिक संदिग्ध फर्जी या ‘प्रॉक्सी’ अकाउंट्स का एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था. चौंकाने वाली बात यह है कि इन अकाउंट्स में खरात को ‘नॉमिनी’ दिखाया गया था और अकाउंट खोलते समय उसके ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था.

इन आरोपों पर अपनी सफाई देते हुए प्रतिभा चाकणकर ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ये खाते पूरी तरह फर्जी हैं. उन्होंने दावा किया है कि उनकी जानकारी के बिना उनके जाली हस्ताक्षर (forged signatures) का उपयोग करके ये खाते खोले गए हैं. हालांकि ED अब उनके और उनके बेटे के बयानों के जरिए इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करेगी.

ED की जांच में अहिल्यानगर की समता नागरी सहकारी पतसंस्था के भीतर एक बेहद जटिल वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है. एजेंसी ने 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन को चिन्हित किया है. अधिकारियों के अनुसार खरात ने धार्मिक गतिविधियों के बहाने अपने अनुयायियों और सहयोगियों से आधार और पैन जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज (KYC) एकत्र किए थे. इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना ‘बेनामी’ या ‘घोस्ट’ अकाउंट खोले गए.

जांच में क्या-क्या पता चला?

जांच एजेंसी का मानना है कि इन अकाउंट्स का इस्तेमाल ‘लेयरिंग’ (पैसे को कई स्तरों पर घुमाना) के लिए किया गया था ताकि फंड के असली स्रोत और मालिक का पता न चल सके. रिकॉर्ड बताते हैं कि इन 100 संदिग्ध अकाउंट्स में से 40 ‘विशेष अकाउंट्स’ थे, जिन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरह इस्तेमाल किया गया. इन अकाउंट्स को कोड नंबर (जैसे 001, 002) दिए गए थे ताकि फंड रोटेशन पर नजर रखी जा सके. प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार इन खातों में कुल 35.53 करोड़ रुपये जमा हुए और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए.

ED ने समता नागरी सहकारी पतसंस्था के निदेशक संदीप ओमप्रकाश कोयते को भी पूछताछ के लिए बुलाया है. एजेंसी यह जानना चाहती है कि बैंक के आंतरिक सिस्टम ने इतने बड़े पैमाने पर एक ही मोबाइल नंबर और नॉमिनी वाले अकाउंट्स पर रेड फ्लैग (चेतावनी) क्यों नहीं जारी किया. वहीं, न्यायिक हिरासत में बंद खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके ने स्वीकार किया है कि उसने खरात के निर्देश पर कई बार इन फर्जी अकाउंट्स में नकदी जमा कराई थी.

कहां तक फैला है मामला?

यह मामला सिर्फ अहिल्यानगर तक सीमित नहीं है. ED ने नासिक की ‘जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था’ के अध्यक्ष नामकरण यशवंत आवरे से भी पूछताछ की है. वहां भी लगभग 34 संदिग्ध घोस्ट अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिनका संबंध अशोक खरात से बताया जा रहा है. जांच एजेंसी आने वाले दिनों में कई और लाभार्थियों और अकाउंट्स होल्डर से पूछताछ कर सकती है.

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