GLP 1 Drugs Reduce Alcohol Addiction: मोटापा कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली जीएलपी-1 आधारित दवाएं अब एक नए कारण से चर्चा में है. हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च में सामने आया कि यह दवाएं शराब की लत को कम करने में भी मदद कर सकती है. मेडिकल जर्नल द लैंसेट छपी रिसर्च ने मोटापा और शराब की लत दोनों से जूझ रहे लोगों के इलाज को लेकर नई उम्मीद पैदा की है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी इस दिशा में और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि जीएलपी दवाएं मोटापे के साथ शराब की लत को कैसे कम कर सकती है और रिसर्च में क्या-क्या दावा किया गया है?
क्या कहती है नई रिसर्च?
यह रिसर्च 108 ऐसे लोगों पर की गई जो मोटापे के साथ-साथ अल्कोहल यूज डिसऑर्डर से जूझ रहे थे. इस दौरान सभी लोगों को काउंसलिंग कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी दी गई और उन्हें दो कैटेगरी में बांटा गया. एक कैटेगरी को हफ्ते में एक बार सेमाग्लूटाइड का इंजेक्शन दिया गया, जबकि दूसरे को प्लेसीबो दिया गया. स्टडी की शुरुआत में रिसर्च में शामिल लोगों पिछले 30 दिनों में औसतन 17 दिन भारी शराब पीने के थे. 6 महीने बाद सेमाग्लूटाइड लेने वाले लोगों में यह संख्या घटकर 5 दिन रह गई. जबकि प्लेसीबो समूह में या आंकड़ा करीब 9 दिन रहा. यानी भारी शराब पीने के दिनों में औसतन 12 दिन की कमी दर्ज की गई, जो प्लेसीबो कैटेगरी के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत ज्यादा है. इसके अलावा कुल शराब सेवन की मात्रा में भी गिरावट देखी गई, जहां शुरुआत में लोग औसतन 2200 ग्राम शराब का सेवन कर रहे थे. वहीं 6 महीने बाद यह घटकर सेमाग्लूटाइड समूह में 650 ग्राम और प्लेसीबो समूह में 1175 ग्राम रह गया.
कैसे काम करती है यह दवाएं?
सेमाग्लूटाइड और टिर्जेपाटाइड जैसी GLP-1 दवाएं शरीर में बनने वाले हार्मोन की तरह काम करती है. यह भूख को कम करती है, पेट भरा होने का एहसास बढ़ाती है और पाचन की गति धीमी कर देती है. रिसर्च के अनुसार इन दवाओं का असर दिमाग के उन हिस्सों पर भी पड़ता है, जो भूख और रिवॉर्ड सिस्टम को कंट्रोल करते हैं, जिससे शराब की लत पर भी असर पड़ सकता है.
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शराब की लत वैश्विक स्तर पर भी बड़ी समस्या
अल्कोहल यूज डिसऑर्डर एक गंभीर स्थिति है, जिसमें व्यक्ति चाहकर भी शराब पीना बंद नहीं कर पाता है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के अनुसार दुनियाभर में करीब 40 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, जो वैश्विक आबादी का लगभग 7 प्रतिशत है. साल 2019 में शराब के कारण करीब 26 लाख लोगों की मौत हुई. इनमें से 16 लाख मौतें गैर-संचारी बीमारियों, 7 लाख चोटों और तीन लाख संक्रामक बीमारियों से जुड़ी थी. वहीं शराब का सेवन 200 से ज्यादा बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ा पाया गया. जिनमें लिवर, दिल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल है. वहीं रिपोर्ट के अनुसार अब तक अल्कोहल यूज डिसऑर्डर के इलाज के लिए बहुत कम दवाएं उपलब्ध है. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अब तक सिर्फ तीन दवाओं डिसल्फिराम, ऐकेम्प्रोसेट और नालट्रेक्सोन को मंजूरी दी है. ऐसे में नए और प्रभावी इलाज की जरूरत भी लंबे समय से महसूस की जा रही है. वहीं भारत में भी जीएलपी-1 आधारित दवाएं तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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