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जब गूगल नहीं था तब बड़े ऑफिसों में कैसे चलता था काम, क्या था तरीका?


आज ऑफिस में किसी जानकारी की जरूरत हो तो कुछ सेकंड में Google पर सर्च करके जवाब मिल जाता है. किसी को मैसेज करना हो तो ईमेल या चैट कर सकते हैं और कोई जरूरी फाइल चाहिए तो कंप्यूटर में ही मिल जाती है. लेकिन जब इंटरनेट, Google, ईमेल और हर कर्मचारी की टेबल पर कंप्यूटर नहीं हुआ करते थे, तब बड़े ऑफिसों में काम करना बिल्कुल अलग था. उस समय जानकारी और जरूरी दस्तावेजों के लिए लोगों को कागज, फाइलों, टेलीफोन और दूसरी ऑफिस मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता था. यानी जो काम आज कुछ मिनटों में हो जाता है, उसे पूरा करने में पहले काफी ज्यादा समय और लोगों की जरूरत पड़ सकती थी. 

 जानकारी चाहिए तो किताबों और रिकॉर्ड का सहारा

जब Google नहीं था, तब किसी जानकारी को खोजने के लिए लोग किताबों, पुराने रिकॉर्ड, डायरेक्टरी और ऑफिस में रखी फाइलों का सहारा लेते थे. बड़ी कंपनियों में अलग-अलग तरह के दस्तावेजों को व्यवस्थित करके रखा जाता था, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें खोजा जा सके. किसी पुराने ग्राहक या कारोबार से जुड़ी जानकारी चाहिए तो कर्मचारी रिकॉर्ड रूम या फाइल कैबिनेट तक जाते थे. कई जगह कार्ड इंडेक्स और अलग-अलग फाइल सिस्टम का इस्तेमाल भी होता था. 

 चिट्ठी, मेमो और टेलीफोन से होती थी बातचीत

आज ऑफिस में एक ईमेल या मैसेज भेजना सबसे आसान काम है, लेकिन पहले कर्मचारियों के बीच बातचीत के लिए आमने-सामने मीटिंग, लिखित मेमो, चिट्ठी और टेलीफोन का इस्तेमाल होता था. जरूरी बातों को लिखकर दूसरे विभाग तक भेजा जाता था और बाहर की कंपनियों या ग्राहकों से संपर्क के लिए टेलीफोन काफी अहम था. टेलीफोन आने के बाद कारोबार में बातचीत पहले के मुकाबले काफी तेज हुई, लेकिन हर जानकारी तुरंत दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना फिर भी आसान नहीं था. 

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टाइपराइटर पर तैयार होते थे जरूरी दस्तावेज

आज Word या Google Docs में कुछ भी लिखकर तुरंत सुधार सकते हैं, लेकिन पहले टाइपराइटर ऑफिस की सबसे जरूरी मशीनों में से एक था. कर्मचारी चिट्ठियां, रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज टाइप करते थे. कई जगह कर्मचारी हाथ से जानकारी लिखते थे और प्रशिक्षित टाइपिस्ट या सेक्रेटरी उसे टाइप करके तैयार करते थे. दस्तावेज में गलती होने पर उसे ठीक करना भी आज की तरह आसान नहीं था, इसलिए टाइपिंग में काफी सावधानी रखनी पड़ती थी. 

फाइलों का था पूरा सिस्टम

आज किसी पुराने दस्तावेज को खोजने के लिए कंप्यूटर में नाम या शब्द सर्च कर लेते हैं, लेकिन पहले हर चीज को सही जगह रखना जरूरी होता था. बड़े ऑफिसों में फाइल कैबिनेट में कागजों को अलग-अलग नाम, नंबर या विषय के हिसाब से रखा जाता था. किसी फाइल को गलत जगह रख दिया जाए तो उसे दोबारा ढूंढने में काफी समय लग सकता था. IBM के इतिहास के मुताबिक, इंटरनेट से पहले ऑफिस में रिकॉर्ड कागजों पर रखे जाते थे और कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर उन दस्तावेजों को खोजने के लिए खुद फाइलों तक जाना पड़ता था. 

कैलकुलेशन भी मशीनों और हाथ से होता था

आज Excel जैसी चीजों से हजारों आंकड़ों पर कुछ सेकंड में हिसाब लगाया जा सकता है, लेकिन पहले ऑफिसों में गणना के लिए कैलकुलेटर, जोड़ने वाली मशीनों और कई मामलों में हाथ से किए गए हिसाब का इस्तेमाल होता था. पुराने समय में खास तरह की मशीनें रिकॉर्ड को गिनने, जोड़ने और व्यवस्थित करने के लिए बनाई गई थीं. यानी बड़े ऑफिसों में काम रुकता नहीं था, बस उसे पूरा करने का तरीका आज से काफी अलग था. 

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