कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर जारी बहस के बीच हॉकी के दिग्गज और पूर्व ओलंपियन मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि जर्सी के रंग को लेकर अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी मैदान पर की गई परफॉर्मेंस होती है, न कि जर्सी का रंग.
अशोक ध्यानचंद ने कहा कि अगर भारतीय टीम की जर्सी का रंग बदलकर केसरिया (सैफरन) कर दिया गया है तो इसमें कोई बुराई नहीं है. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को जर्सी के रंग से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता. आखिरकार जीत और हार का फैसला उनके खेल से होता है, न कि उनकी ड्रेस के रंग से. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी की अपनी एक अलग पहचान और गरिमा रही है.
भगवा रंग से कोई दिक्कत नहीं
अशोक ध्यानचंद ने कहा, “कई दशकों तक भारतीय खिलाड़ी ब्लू जर्सी पहनकर खेलते रहे हैं. उस जर्सी के साथ एक पहचान और गर्व की भावना जुड़ गई थी. इसलिए ब्लू जर्सी का अपना एक महत्व जरूर था.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर जर्सी का रंग सैफरन कर दिया गया है तो इसमें कोई समस्या नहीं है. केसरिया रंग भी भारत की पहचान और संस्कृति का हिस्सा है. हमें रंग पर नहीं, बल्कि टीम इंडिया के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए.”
नीले टर्फ की वजह से बदल दिया रंग
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर कुछ लोगों ने तर्क दिया कि हॉकी का एस्ट्रो टर्फ नीले रंग का होता है, इसी वजह से टीम इंडिया की जर्सी का रंग बदल कर केसरिया कर दिया गया. मगर अशोक ध्यानचंद इस तर्क से सहमत नहीं हैं.
अशोक ध्यानचंद ने इस तर्क पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से नीली जर्सी पहनती आ रही है और कई सालों से अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में ब्लू एस्ट्रो टर्फ का इस्तेमाल होता रहा है. दोनों चीजों को एकसाथ जोड़कर यह कहना सही नहीं है कि टर्फ की वजह से जर्सी का रंग बदल दिया गया.
लोग अपनी टीम का फुल सपोर्ट करें
दिग्गज खिलाड़ी ने भारत के लोगों से अपील करके कहा कि भारतीय टीम जब भी वर्ल्ड कप या किसी बड़े टूर्नामेंट में खेलने उतरे, तब सभी देशवासियों को अपनी टीम का समर्थन करना चाहिए. जर्सी का रंग नीला हो या केसरिया, हर रंग भारत का ही प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए बहस का मुद्दा जर्सी नहीं बल्कि खिलाड़ियों का प्रदर्शन और देश के लिए उनका योगदान होना चाहिए.
अंत में उन्होंने कहा कि मैदान पर वही टीम सफल होती है जो बेहतर खेल दिखाती है. इसलिए जर्सी के रंग से अधिक महत्व खिलाड़ियों के प्रदर्शन, मेहनत और परिणाम का होना चाहिए.
