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‘तेलंगाना किसी एक पार्टी की जागीर नहीं’, जन सेना के कार्यक्रम पर कांग्रेस मंत्री पोन्नम प्रभाकर का तीखा हमला


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  • जन सेना ने तेलंगाना स्थापना दिवस पर जनसभा का ऐलान किया।
  • कांग्रेस और संगठनों ने राज्य निर्माण के इतिहास पर सवाल उठाए।
  • टीआरएस ने गलत बयानबाजी पर विरोध की चेतावनी दी।
  • स्थापना दिवस से पहले तेलंगाना में सियासत तेज हुई।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की पार्टी जन सेना की तरफ से मंगलवार (2 जून, 2026) को तेलंगाना के स्थापना दिवस पर तेलंगाना में जनसभा के ऐलान ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस और तेलंगाना राज्य के गठन से जुड़े संगठनों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना आंदोलन, राज्य निर्माण और सियासी मर्यादाओं को लेकर सवाल उठाए हैं.

तेलंगाना के स्थापना दिवस के मौके पर जन सेना की प्रस्तावित सार्वजनिक बैठक को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है. इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि तेलंगाना कोई एक व्यक्ति या एक पार्टी की पहचान नहीं है. उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य के दशकों तक चले संघर्ष, बलिदान और जन आंदोलन का परिनाम है.

पोन्नम प्रभाकर ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि हैदराबाद में मीटिंग करके तेलंगाना के इतिहास और राज्य निर्माण को लेकर कुछ सियासी दल अपना कथा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना था कि तेलंगाना के निर्माण में आम लोग, विद्यार्थी, कर्मचारी और आंदोलनकारी भूमिका निभा सकते हैं.

TRS अध्यक्ष के. कविता ने क्या कहा?

इस बीच तेलंगाना रक्षा समिति (TRS) के अध्यक्ष के. कविता ने भी इस मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि तेलंगाना के निर्माण को लेकर गलत या भ्रमक बयान देने की कोशिश की गई तो उसका विरोध किया जाएगा. कविता ने स्पष्ट रूप से कहा कि तेलंगाना की जनता ने लंबी लड़ाई लड़कर अलग राज्य हासिल किया है और इस इतिहास को बदलने या काम करने के लिए किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा. 

उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेलंगाना के आंदोलन और बलिदानों को नजरंदाज करने वाले बयान दिए गए तो तेलंगाना रक्षा समिति चुप नहीं बैठेगी और इसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा.

जन सेना के कार्यक्रम के ऐलान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब तेलंगाना की सियासी चर्चा का केंद्र बन गया है. राज्य निर्माण के इतिहास, आंदोलन के नेतृत्व और सियासी दावेदारी को लेकर अलग-अलग दल अपनी व्याख्या रख रहे हैं. इसके चलते तेलंगाना स्थापना दिवस से पहले सियासी गतिविधियां और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. 

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