दिल्ली के गांधी नगर इलाके में एक मकान में दरार आने के बाद उसके एक तरफ झुकने का मामला सामने आया है. मकान की हालत को देखते हुए एमसीडी ने इसे खतरनाक बताते हुए नोटिस चस्पा किया और मकान खाली कराने के निर्देश दिए.
मकान मालिक का आरोप है कि पिछले करीब डेढ़ साल से इलाके में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से बार-बार सड़क की खुदाई की जा रही थी. उनका दावा है कि 10 से 20 फीट तक हुई खुदाई के बाद गड्ढों में पानी भरने से मकान की नींव कमजोर हुई और इमारत झुक गई. वहीं, पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने भी सड़क की खुदाई और जल बोर्ड के काम को लेकर सवाल उठाए हैं.
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डेढ़ साल से रह रही थी किरायेदार
मकान में रहने वाली किरायेदार हेमलता ने बताया कि वह अपनी बेटी संगीता के साथ करीब डेढ़ साल से इस मकान में रह रही थीं. उनका कहना है कि जब वह यहां रहने आई थीं, तब मकान इस तरह नहीं झुका था. अब मकान की स्थिति खराब होने के बाद उन्हें इसे खाली करने के लिए कहा गया है.
मकान मालिक ने जल बोर्ड की खुदाई पर उठाए सवाल
मकान मालिक विक्रम जुनेजा ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ साल में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से इलाके में कई बार सड़क की खुदाई की गई. उनके मुताबिक, करीब 15 से 20 फीट तक खुदाई की गई और गड्ढों में पानी भरने की वजह से मकान की नींव पर असर पड़ा. विक्रम जुनेजा का कहना है कि उन्हें इससे पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया था.
उनके मुताबिक, 12 सितंबर की शाम करीब 5 बजे एमसीडी की ओर से मकान पर नोटिस चस्पा किया गया. मकान मालिक ने कहा कि यह कॉर्नर का मकान है और इसके बिल्कुल पास 15 से 20 फीट तक गहरी खुदाई की गई.
उनका सवाल है कि ऐसे में मकान पर इसका असर कैसे नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि प्रशासन अगर सड़क की खुदाई करता है तो गड्ढों को ठीक तरीके से भरने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होनी चाहिए.
एक महीने में दो बार सड़क खोदने का दावा
विक्रम जुनेजा के मुताबिक, करीब एक महीने में दो बार सड़क खोदी गई. उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को नोटिस चस्पा किए जाने से एक दिन पहले भी नाली के निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई की जा रही थी. उन्होंने बताया कि मकान में सुरक्षा के लिए जो लोहे के जैक्स लगाए गए हैं, उन्हें उन्होंने नहीं लगवाया है. उनका कहना है कि इस पूरे मामले में प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
एमसीडी की ओर से मकान को खाली कराकर तत्काल मरम्मत कराने के लिए कहा गया है. इसके बाद मकान की स्ट्रक्चरल रिपोर्ट की जांच की जाएगी. मकान मालिक का कहना है कि वह चाहते हैं कि इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड की भूमिका की भी जांच हो.
‘रातों-रात सामान लेकर कहां जाएंगे’
विक्रम जुनेजा ने बताया कि यह मकान करीब 20 से 25 साल पुराना है और 50 गज में तीन मंजिल का बना हुआ है. उन्होंने कहा कि परिवार ने सालों की मेहनत से मकान बनाया है. ऐसे में अचानक मकान खाली करने के निर्देश के बाद उनके सामने यह सवाल है कि परिवार अपना सामान लेकर रातों-रात कहां जाएगा.
मकान मालिक ने आसपास के कुछ दूसरे मकानों में बने बेसमेंट को लेकर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि कुछ जगहों पर बेसमेंट में दो-दो मंजिल तक खुदाई की गई है और वहां व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही हैं, लेकिन उन जगहों पर एमसीडी की कार्रवाई नहीं हो रही.
पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने क्या कहा?
मकान में आई दरार और एमसीडी के नोटिस को लेकर पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने भी दिल्ली जल बोर्ड की खुदाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस सड़क पर पिछले करीब एक साल से काम चल रहा है. उनके मुताबिक, कहीं 10 फीट तो कहीं 15 फीट तक खुदाई की गई और खुदाई के बाद गड्ढों में पानी भरने से आसपास के मकानों पर असर पड़ा.
श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि इस कॉर्नर के मकान के आसपास पानी घुसने की वजह से यह खतरनाक स्थिति में पहुंच गया. उनके मुताबिक, निगम ने भी मकान को खतरनाक बताया है, इसलिए अब इसे खाली कराना जरूरी है.
‘जल बोर्ड को नुकसान की भरपाई करनी चाहिए’
पूर्व मेयर ने दावा किया कि जब करीब तीन महीने तक जल बोर्ड की ओर से काम नहीं हुआ तो स्थानीय लोगों ने सड़क बनवा दी थी. उनके मुताबिक, सड़क बनने के करीब 10 दिन बाद ही जल बोर्ड ने दोबारा सड़क खोद दी. उन्होंने इसे जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी बताया.
श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि मकान को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई दिल्ली जल बोर्ड को करनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इमारत के झुकने के पीछे जल बोर्ड की लापरवाही है. उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ यह मकान झुका हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन सड़क की खुदाई का असर आसपास के दूसरे मकानों पर भी हुआ हो सकता है. उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही.
जांच के बाद तय होगा मकान का क्या होगा
श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि मकान मालिक की ओर से आवेदन कराया जाएगा और पूरे मामले की जांच होगी. इसके बाद देखा जाएगा कि इमारत की मरम्मत कर उसे सुरक्षित किया जा सकता है या नहीं. अगर मरम्मत से मकान सुरक्षित हो सकता है तो उसे ठीक कराया जाएगा.
उनका यह भी कहना है कि अगर जांच में जान-माल के नुकसान का खतरा सामने आता है तो इमारत को तोड़ने का फैसला लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल अच्छी बात यह है कि मकान को समय रहते खाली कराया जा चुका है, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके.
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