पिथौरागढ़ के धारचूला में कुलागाड़ वैली ब्रिज टूटने के 48 घंटे बाद भी वैकल्पिक पुल तैयार नहीं हो सका है. भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला यह बेहद महत्वपूर्ण संपर्क पुल टूटने से दारमा, व्यास और चौदास घाटी समेत करीब 35 हजार की आबादी का धारचूला मुख्यालय से संपर्क कट गया है.
शुक्रवार देर रात जुम्मा गांव के ऊंचाई वाले क्षेत्र में बादल फटने के बाद नाला उफान पर आ गया और कुलागाड़ में बना वैली ब्रिज इसकी चपेट में आकर टूट गया. इसके बाद क्षेत्र की पूरी आवाजाही ठप हो गई और सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया.
सेना के जवानों ने संभाला मोर्चा
हालात बिगड़ने के बाद सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला. रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे फंसे लोगों को नाले के आर-पार निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिससे लोगों को कुछ हद तक राहत जरूर मिली है. वहीं यात्रा के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर उफनते नदी को पार करने को मजबूर है एक छोटी से लापरवाही किसी की जिंदगी छीन सकती है.
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लगातार बढ़ रहीं मुश्किलें
लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी वैकल्पिक पुल तैयार नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब लोगों को जान जोखिम में डालकर रस्सियों के सहारे चट्टानों और उफनाते नाले के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है.
वहीं जब एबीपी न्यूज की टीम मौके पर पहुंची तो हालात की भयावह तस्वीर सामने आई. लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि आखिर किस तरह मजबूरी में जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है. एबीपी की टीम को भी रस्सियों के सहारे खतरनाक चट्टानों के बीच इस रास्ते को पार करना पड़ा. बहरहाल कुलागाड़ में इस वक्त किस तरह मौत के खतरे के बीच आवाजाही करने को मजबूर हैं लोग.
Input By : नीरज मेहता
