संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है. वांगचुक ने अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के जरिए संदेश दिया है कि अगर राजनीतिक दल संसद में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और कथित नीट अनियमितताओं का मुद्दा उठाने का भरोसा दें तो वह अपना अनशन खत्म कर देंगे.
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है. ऐसे में संसद सत्र के पहले दिन आंदोलन, राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वांगचुक ने संदेश भेजा है कि अगर राजनीतिक दलों के नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि मानसून सत्र के दौरान शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और कथित नीट अनियमितताओं का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा, तो वह सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर देंगे. उन्होंने समर्थकों से अपील की कि प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और आंदोलन का किसी भी गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल न होने दिया जाए.
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दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?
गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल द्वारा परिवार को बताई गई मेडिकल रिपोर्ट और स्वतंत्र लैब की रिपोर्ट में पोटैशियम स्तर को लेकर अंतर है. उनका कहना है कि परिवार वांगचुक को मेदांता या किसी अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना चाहता है, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही. उन्होंने अस्पताल में भारी पुलिस तैनाती, निजी डॉक्टरों को जांच की अनुमति न मिलने और फोन व टैबलेट के इस्तेमाल पर रोक को लेकर भी सवाल उठाते हुए इसे ‘अवैध हिरासत’ जैसा बताया.
रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि फिलहाल वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने का कोई अंतरिम आदेश देने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने माना कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाना मनमाना नहीं कहा जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और इलाज उनकी सहमति के आधार पर ही किया जा रहा है. हालांकि हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और सफदरजंग अस्पताल को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी.
उधर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को संसद तक मार्च निकालने की तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने और पूरी रात वहीं डटे रहने की अपील की. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश कर सकती है. वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संसद मार्च से पहले ही जंतर-मंतर और उसके आसपास करीब 20 हजार लोग मौजूद हैं.
दिल्ली पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
दिल्ली पुलिस ने रविवार को एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया कि संसद तक किसी भी मार्च की न तो अनुमति मांगी गई है और न ही दी गई है. नई दिल्ली जिले में धारा 163 बीएनएसएस लागू है, जिसके तहत पांच या अधिक लोगों के जुलूस, मार्च और प्रदर्शन प्रतिबंधित हैं. पुलिस ने कहा कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इसी बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी संसद सत्र और प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. संसद मार्ग, रफी मार्ग, अशोक रोड, रायसीना रोड, मौलाना आजाद रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना जताई गई है. लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने और अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है. सूत्रों के मुताबिक संसद परिसर, जंतर-मंतर, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और नई दिल्ली जिले के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, वाहनों की सघन जांच और निगरानी बढ़ा दी गई है.
अब सोमवार को सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि सरकार वांगचुक की अपील पर स्पष्ट रुख अपनाती है या नहीं? अगर CJP तय कार्यक्रम के अनुसार संसद मार्च निकालने की कोशिश करती है और पुलिस इस पर क्या कार्रवाई करती है. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन इन घटनाक्रमों के चलते राजधानी में राजनीतिक हलचल और सुरक्षा व्यवस्था दोनों चरम पर रहने की संभावना है.
