दिल्ली सरकार फील्ड ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की अटेंडेंस व्यवस्था को ज्यादा सटीक और जवाबदेह बनाने की तैयारी में है. प्रस्तावित व्यवस्था लागू हुई तो सिर्फ ऑफिस में लगी बायोमीट्रिक मशीन पर हाजिरी दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी. मोबाइल आधारित सिस्टम में फेस रिकग्निशन के साथ रियल टाइम लोकेशन भी दर्ज करने का विकल्प तैयार किया जा रहा है.
दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने वाले फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अटेंडेंस सिस्टम में प्रस्तावित बदलाव के तहत मोबाइल आधारित बायोमीट्रिक अटेंडेंस को फेस रिकग्निशन एप्लीकेशन से जोड़ा जा सकता है. साथ ही कर्मचारी की वास्तविक समय की लोकेशन भी रिकॉर्ड करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है.
फिलहाल इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले इसकी तकनीकी व्यवहार्यता जांची जा रही है. सरकार ने आईटी ब्रांच को इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.
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कई कार्यालयों से अटेंडेंस रिपोर्ट नहीं मिलने पर उठा सवाल
यह मामला विभिन्न विभागों के जिला कार्यालयों और विभागीय संस्थानों में चल रही अटेंडेंस व्यवस्था की समीक्षा के दौरान सामने आया. बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद कई जिला कार्यालयों और संस्थानों से बायोमीट्रिक अटेंडेंस की रिपोर्ट नियमित रूप से नहीं मिल रही है.
समीक्षा में इसके पीछे मुख्य रूप से दो वजहें सामने आईं. कई कार्यालयों में लगी बायोमीट्रिक मशीनों में बार-बार तकनीकी खराबी की शिकायत है. वहीं दूसरी बड़ी समस्या उन अधिकारियों की है, जिनकी ड्यूटी का बड़ा हिस्सा कार्यालय से बाहर फील्ड में गुजरता है.
ऑफिस में लगी मशीन से फील्ड ड्यूटी की हाजिरी बनी चुनौती
फील्ड ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए केवल कार्यालय परिसर में लगी मशीन से उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है. ऐसे में कर्मचारी ड्यूटी के सिलसिले में बाहर मौजूद होने के बावजूद ऑफिस की बायोमीट्रिक मशीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाते.
यही वजह है कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों की अटेंडेंस रिपोर्ट अधूरी रह जाती है. प्रस्तावित मोबाइल आधारित व्यवस्था को इसी समस्या का समाधान माना जा रहा है, क्योंकि इससे कर्मचारी के फील्ड में मौजूद रहने के दौरान भी उसकी उपस्थिति सत्यापित करने का विकल्प मिल सकता है.
फेस रिकग्निशन के साथ पता चलेगी कर्मचारी की लोकेशन
प्रस्तावित सिस्टम में फेस रिकग्निशन एप्लीकेशन को अटेंडेंस व्यवस्था के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. इसके जरिए कर्मचारी के चेहरे की पहचान कर उसकी उपस्थिति को सत्यापित किया जा सकेगा.
इसके साथ रियल टाइम जियो-लोकेशन दर्ज होने से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि अटेंडेंस दर्ज करते समय संबंधित कर्मचारी किस स्थान पर मौजूद था. इससे फील्ड ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की उपस्थिति को मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले ज्यादा प्रभावी तरीके से सत्यापित करने में मदद मिल सकती है.
खराब हो रही मशीनों पर अब CCTV की नजर
दूसरी ओर, कार्यालयों में पहले से मौजूद बायोमीट्रिक मशीनों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने सख्ती का रुख अपनाया है. केयरटेकिंग ब्रांच के अनुसार अलग-अलग कार्यालयों से मशीनों में खराबी की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. सर्विस इंजीनियरों की जांच के दौरान कुछ मशीनों के भीतर पानी पहुंचने की बात सामने आई. खास बात यह रही कि संबंधित स्थानों के आसपास पानी का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं मिला. इसके बाद मशीनों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका भी जताई गई.
जिला कार्यालयों से मुख्यालय तक बढ़ेगी निगरानी
मशीनों को नुकसान पहुंचाने की आशंका के मद्देनजर अब जिला कार्यालयों, विभागीय संस्थानों और मुख्यालय में लगे बायोमीट्रिक उपकरणों को CCTV निगरानी में रखने का फैसला किया गया है. इससे मशीनों के आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और खराबी या नुकसान की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिल सकती है. मोबाइल आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम को लेकर अंतिम फैसला आईटी ब्रांच की फिजिबिलिटी रिपोर्ट के बाद ही होगा.
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