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दिल्ली सरकार का नया राइट टू सर्विस कानून मंजूर, तय समय में काम न होने की गलती जेब पर पड़ेगी भारी


सरकारी दफ्तरों में आवेदन देने के बाद महीनों तक इंतजार करने और बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी अब कम हो सकती है. दिल्ली सरकार ने सरकारी सेवाओं की समयबद्ध डिलिवरी सुनिश्चित करने के लिए नया राइट टू सर्विस विधेयक मंजूर किया है. इस कानून के लागू होने के बाद निर्धारित समय के भीतर सेवा उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होगी. यदि बिना उचित कारण देरी होती है तो अधिकारी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकेगा.

पुरानी व्यवस्था में अपील का था विकल्प, अब शिकायत अपने आप बढ़ेगी

अब तक दिल्ली के विभिन्न विभागों में सैकड़ों सेवाओं के लिए समय-सीमा तय होने के बावजूद उसके उल्लंघन पर अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होती थी. नागरिकों को केवल अपील का अधिकार मिलता था, जिससे कई मामलों में प्रक्रिया लंबी हो जाती थी. नई व्यवस्था इस कमी को दूर करने का दावा करती है.

नए विधेयक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि तय समय तक सेवा नहीं मिलती, तो नागरिक को अलग से शिकायत दर्ज कराने के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. समय-सीमा समाप्त होते ही मामला स्वतः विभाग के नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी के पास पहुंच जाएगा, जहां देरी के कारणों की समीक्षा की जाएगी.

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स्वतंत्र आयोग रखेगा पूरी व्यवस्था पर नजर

सरकार ने देरी करने वाले अधिकारियों के लिए आर्थिक दंड का प्रावधान किया है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी सेवा के लिए 21 दिन की समय-सीमा निर्धारित है और काम पूरा नहीं होता, तो अगले दिन से संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगेगा. जो प्रति विलंबित दिनों के हिसाब से बढ़ती जाएगी. यह राशि अधिकतम 5,000 रुपये तक पहुंच सकती है.

विधेयक के तहत दिल्ली राइट टू सर्विस आयोग का गठन भी किया जाएगा. यह आयोग दूसरी अपीलों की सुनवाई करने के साथ-साथ पूरे कानून के पालन की निगरानी करेगा. जरूरत पड़ने पर सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करेगा और लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकेगा.

500 से ज्यादा सेवाओं पर पड़ेगा असर, राहत मिलेगी

डीडीए, एमसीडी, राजस्व विभाग सहित कई सरकारी संस्थानों की लगभग 500 सेवाएं इस व्यवस्था के दायरे में आएंगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को प्रमाण पत्र, लाइसेंस, अनुमतियां और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी कामों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है. फाइलों को बिना कारण लंबित रखना आसान नहीं होगा, सिफारिशों की जरूरत घटेगी और नागरिकों को तय समय में सेवाएं मिलने का कानूनी आधार मिलेगा.

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