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दिल्ली SIR पर SC में सुनवाई, अधीर रंजन बोले- ‘किस पर भरोसा करें…’


कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बंगाल एसआईआर की वोटर लिस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर कहा है कि हम आज कोर्ट इसलिए आए थे, क्योंकि हम पिछली सुनवाई से ही यह मुद्दा उठा रहे हैं. हमारे वकील भी हमारे साथ हैं. 

उन्होंने कहा कि हम मांग कर रहे हैं कि बंगाल में लाखों लोगों को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित कर दिया गया है. वैध वोटरों को अमान्य घोषित कर दिया गया है. यह प्रक्रिया चुनाव शुरू होने के पहले ही चल रही है. 

बिहार के बाद चुनावी गड़बड़ी बंगाल पहुंच गई: अधीर रंजन

इसके अलावा अधीर रंजन ने पीएम मोदी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी जी कहते थे कि बिहार के बाद वे गंगा के रास्ते बंगाल पहुंचेंगे. उसी तरह बिहार के बाद यह चुनावी गड़बड़ी बंगाल भी पहुंच गई है. हमने बंगाल में चुनाव आयोग की मनमानी भी देखी है. 

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हर दिन सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए जाने वाले सबूत बदलते रहते हैं. जिस जिले से हम आते हैं, मुर्शिदाबाद, वहां बंगाल के सबसे ज्यादा लोगों को उनके वैध वोटिंग अधिकारों से वंचित किया गया. ट्रिब्यूनल बने कई महीने बीत चुके हैं. मुर्शिदाबाद में ही सबसे ज्यादा वैलिड वोटरों को लिस्ट हटाया गया था. क्या आप जानते हैं कि अब तक कितने मामलों को निपटारा हुआ है?’ 

अधीर रंजन ने कहा, कि बंगाल में ही ट्रिब्यलन ने सिर्फ 514 अपीलों पर फैसला किया है. इनमें से लगभग 96 या 97 प्रतिशत मामले सही पाए गए. यानी उनका वोट देने के अधिकार बहाल कर दिया गया. 

‘हम किस पर भरोसा करें, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट?’

उन्होंने कहा कि बंगाल के एक जज ने कुछ दिन पहले कहा था कि जिस रफ्तार से बंगाल में ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं, उस हिसाब से इस प्रक्रिया को पूरा होने में 21 साल लगेंगे. सुप्रीम कोर्ट के सामने यह तर्क दिया गया है कि अगर इसी स्पीड से प्रक्रिया चलती रही, तो 12 साल लगेंगे. हम किस कोर्ट पर भरोसा करें, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट पर?
 
उन्होंने कहा, ‘बीच में क्या होता है, लाखों की तदाद में, आज जो सिर्फ बंगाल में सीमित थी, वो पूरे देश में फैल गए हैं. हमारे उपराष्ट्रपति से लेकर, मंत्री से लेकर, आर्मी ऑफिसर से लेकर, किसी के बचाव का कोई रास्ता नहीं है. सारे देश में हाहाकार मच चुका है. आज सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को दिल्ली के वकीलों ने उठाया है. नारा लगाते हुए, मैंने देखा है. सुप्रीम कोर्ट के अंदर भी प्रशांत भूषण और दूसरे वकीलों ने इस मुद्दे को उठाया.’



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