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‘मैं मुस्लिम हूं, महिला हूं, मुझे तो प्रताड़ना…’, इकरा हसन का बड़ा बयान


समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर ऐसा बयान दिया है जो सुर्खियों में आ गया है. कैराना सांसद ने महिलाओं से संवाद करते हुए कई ऐसी बातों को जिक्र किया जिसका सामना अक्सर महिलाओं को करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मैं मुस्लिम हूं और महिला भी हूं तो मुझे तो कई लेयर्स की प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. 

इकरा हसन ने कहा कि पुरुषों का जो समाज पर कब्जा रहा है. उस सोच से भी हमें लगातार लड़ना पड़ रहा है. जब भी हम किसी पुरुष वर्ग की बात करते हैं तो हम कभी उनके पहनावे पर बात नहीं करते. उन्होंने क्या पहना है क्या नहीं पहना है वो मुश्किल से डिबेट का हिस्सा होता है. लेकिन, जब आप महिला होते हुए किसी भी फील्ड में आगे बढ़ने का काम करती है तो सबसे पहले आपके चरित्र पर वार करके, आपके पहनावे को टार्गेट करके किया जाता है. 

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‘चरित्र और पहनावे को टार्गेट किया जाता है’

सपा सांसद ने कहा कि इसका सामना हम लोग हर रोज करते हैं. आपकी पहचान है उसे टार्गेट किया जाता है. आपकी शादी हुई या नहीं हुई उससे जोड़ा जाता है. जबकि इनका मेरे काम से कोई संबंध नहीं है. ये सब मेरी महिला होने की पहचान से संबंधित है. इसका सामना आप भी करते हैं और हम भी करते हैं. 

इकरा हसन ने कहा कि जहां तक मेरी बात है तो “मैं मुस्लिम हूं…महिला हूं… ओबीसी हूं…तो मुझे कई लेयर्स की प्रताड़ना झेलनी पड़ती है…लेकिन, ये मेरे काम का हिस्सा है. मुझे लगता है कि जब लोग आपको आपके काम से नहीं हरा सकते तो इसी तरह की छोटी बातें करके अपने लेवल पर लाना चाहते हैं. मैं भी सीख रही हूं कि अपनी चमड़ी को थोड़ा मोटा करूं. 

नजर मिलाकर बात नहीं करते अधिकारी

उन्होंने कहा कि वो जब भी काम करती है तो वहां ज्यादातर अधिकारी पुरुष होते हैं और उनको ‘औरत से ऑर्डर’ लेना नहीं आता है. अगर उनसे कोई बात कहना होता है तो वो मेरी नजरों से नजरें नहीं मिला सकते. अगर उन्हें कुछ कहना हो तो वो मेरे साथ बैठे अधीनस्थ को देखकर बात करते हैं, मुझसे डायरेक्ट बात नहीं करते हैं. ये छोटी बातें हैं, लेकिन इसके बहुत बड़े मायने हैं और यही बदलना है. 

ये जरूरी है कि आप और हम मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं बनाएं जिसमें महिलाओं नेतृत्व कर रही हों. चाहे वो फैमिली का मामला हो या अन्य कोई भी सामाजिक प्रोग्राम ऐसा हो. जब तक हम लोग जो डिजर्व करते हैं वो क्लेम नहीं करेंगे उसे मांगने का आत्मविश्वास नहीं जुटाएंगे तो हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर रास्ता नहीं खोल पाएंगे. 

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