- ममता बनर्जी ने भाजपा शासन में पुलिस को भक्षक करार दिया।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की तरफ से दिए गए धरने के चेतावनी पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार (4 सितंबर, 2026) को तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा. ममता दीदी अपना नौटंकी छोड़ दें और कानून पर भरोसा रखें. जो भी कोई गलत किया होगा, कानून उसे सजा देगा.
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने राजधानी कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को तड़के हुई तोड़फोड़ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है. इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन पर और उनकी पार्टी पर कथित अत्याचार बंद नहीं हुआ, तो वह दिल्ली जाकर भाजपा नेताओं के घरों के सामने धरना देंगी.
BJP ने गुंडे भेजकर टीएमसी ऑफिस में तोड़फोड़ कराई- ममता
ममता बनर्जी ने गुरुवार (3 सितंबर) की शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित लाइव संदेश में भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि BJP ने आधी रात के गुंडे भेजकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ऑफिस में तोड़फोड़ कराई और वहां रखे हुए कागजातों, रिकॉर्ड्स और बाकी सामानों को इधर-उधर कर दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कथित अत्याचार बंद नहीं हुआ तो वह दिल्ली जाकर बीजेपी नेताओं के आवासों के सामने धरना देंगी.
#WATCH | Patna, Bihar | On Mamata Banerjee’s dharna statement, Union Minister Giriraj Singh says, “The law will take its course; Mamata Didi should place her trust in the law… The law will punish anyone found guilty of wrongdoing.” pic.twitter.com/v1hMy5xoSr
— ANI (@ANI) September 4, 2026
उन्होंने अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में हुई घटना को मध्यरात्री की बर्बरता करार देते हुए कहा, ‘अगर राजधानी कोलकाता जैसे शहर में आधी रात को इस तरह की घटनाएं घट सकती हैं, तो इस पर भी जरूर सोचना चाहिए कि ग्रामीण बंगाल में क्या हो रहा होगा?
भाजपा शासन में पुलिस रक्षक नहीं, भक्षक बनीं- ममता बनर्जी
टीएमसी प्रमुख ने इस दौरान पश्चिम बंगाल की पुलिस पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन में पुलिस की भूमिका भी रक्षक से भक्षक जैसी हो गई है. जो पुलिस अधिकारी वर्दी का सम्मान करते हुए रक्षक होने की जिम्मेदारी निभाते हैं, वह उनका भी सम्मान करती हैं, लेकिन सबूत को मिटाने और गवाहों को निशाना बनाने वाले पुलिस अधिकारियों के प्रति उनके मन में कोई सम्मान नहीं है.
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