Expressway Collapse: गर्मीं से राहत पाने के लिए कई प्रदेशों में मानसून का इंतजार हो रहा है. जबकि मानसून के आते ही उत्तर प्रदेश में सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. लखनऊ और कानपुर के बीच सफर को आसान बनाने के लिए बने 4700 करोड़ रुपये के नए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की सड़क पहली ही बारिश में धंस गई. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुए अभी महज 13 दिन पहले ही हुआ था.
बता दें कि, उन्नाव के पास सड़क पर मिट्टी खिसकने से बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और पानी भर गया है. इस घटना के बाद से ही सड़क की क्वालिटी और निर्माण में हुए काम पर बड़े सवाल उठने लगे हैं. लोग हैरान हैं कि इतने महंगे प्रोजेक्ट का यह हाल इतनी जल्दी कैसे हो गया. तो चलिए जानतें हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और इस पर अभी क्या एक्शन लिया गया है.
13 दिन में ही सड़क में आई दरारें
बता दें कि, कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अभी हाल ही में 13 जुलाई को काफी धूम-धाम से किया गया था. इसका उद्घाटन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मिलकर किया था. लेकिन उद्घाटन के सिर्फ 13 दिन बाद उन्नाव के कोरारी इलाके के पास एक्सप्रेसवे की कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में मिट्टी धंस गई.
मिट्टी खिसकने की वजह से सड़क पर लंबी-लंबी दरारें पड़ गईं और वहां पानी भर गया. जैसे ही इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आए लोगों ने सड़क की बनावट पर सवाल उठाना शुरू कर दिया. लोकल लोगों का कहना है कि जब अभी से यह हाल है तो आगे चलकर भारी मानसून में हालत और भी खराब हो सकती है.
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चल रहा है मरम्मत का काम
कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे सड़क धंसने और वीडियो वायरल होने के बाद निर्माण एजेंसी में हड़कंप मच गया. एजेंसी ने तुरंत मौके पर अपनी टीम भेजी और सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया. कंस्ट्रक्शन एजेंसी की तरफ से बताया गया है कि जहां-जहां सड़क को नुकसान पहुंचा था. वहां पैच वर्क करके उसे ठीक कर दिया गया है.
हालांकि, लोगों का मानना है कि इतने बड़े और महंगे एक्सप्रेसवे पर सिर्फ पैच वर्क करना काफी नहीं है बल्कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए. सड़क धंसने के कारण कुछ देर तक वहां ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ जिसे बाद में ठीक करवाया गया. लेकिन पहली ही बारिश में सड़क का इस तरह टूटना एजेंसी के काम पर बड़ा दाग लगाता है.
कितना खास है यह कॉरिडोर?
आपको बता दें कि, यह कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे कुल 63 किलोमीटर लंबा 6-लेन का एक हाई-स्पीड कॉरिडोर है. इसके बनने से कानपुर और लखनऊ के बीच का सफर काफी आसान हो गया है. पहले जहां दोनों शहरों के बीच आने-जाने में दो से तीन घंटे लगते थे. वहां अब यह दूरी महज 35 से 40 मिनट में पूरी हो जाती है.
इस कॉरिडोर से रोजाना हजारों गाड़ियों का आवागमन होता है जिससे लोगों का समय और पेट्रोल दोनों बचता है. लेकिन इतने अहम रास्ते पर अगर पहली बारिश में ही सड़क धंसने लगेगी तो आने वाले दिनों में यह हजारों यात्रियों के लिए खतरा बन सकता है. इसीलिए लोग मांग कर रहे हैं कि इस निर्माण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटना दोबारा न हो.

सियासत हुई तेज
बता दें कि, इस मुद्दे के सामने आते ही यूपी की राजनीति में भी गरमा-गर्मी बढ़ गई है. समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करके सरकार पर तीखे हमले बोले. सपा ने आरोप लगाया कि हजारों करोड़ के इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार हुआ है और जनता के पैसे की बर्बादी की गई है. विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े नेताओं के उद्घाटन करने के बावजूद 12-13 दिन में सड़क का धंस जाना दिखाता है कि काम कितना लापरवाही से हुआ है.
जबकि स्थानीय विधायक ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि नए बने रास्तों में बारिश के वक्त ऐसी मामूली समस्याएं आना आम बात है. उन्होंने कहा कि जहां भी दिक्कत आएगी उसे तुरंत ठीक करा दिया जाएगा और विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है.
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