भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर रूस ने भरोसा जताया है. भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारत ने कई मौकों पर साबित किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है और दबाव के बावजूद अपनी स्थिति पर कायम रह सकता है.
रूसी राजदूत से जब पूछा गया कि मॉस्को भारत-रूस ऊर्जा सहयोग को लेकर कितना आश्वस्त है तो उन्होंने सवाल को भारत के नजरिए से देखने की बात कही. अलीपोव के मुताबिक, भारत ने दिखाया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि तेल कारोबार से जुड़े प्रतिबंध और टैरिफ भी भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग को प्रभावित करते हैं.
#WATCH | Delhi: On being asked how confident Moscow is about the India-Russia energy cooperation, Russian Ambassador to India, Denis Alipov, says, “The question is – how confident is India? India has shown that it’s able to stand its ground and defend its national interests. And… pic.twitter.com/gOZ3HFA4TR
— ANI (@ANI) September 4, 2026
भारत की जरूरत के मुताबिक तेल देने को तैयार रूस
डेनिस अलीपोव ने कहा कि रूस भारत की जरूरत के अनुसार तेल की सप्लाई जारी रखने में रुचि रखता है. उनका कहना था कि भारत को जितने तेल की जरूरत होगी, रूस उतनी सप्लाई करने के लिए तैयार रहेगा. उन्होंने प्रतिबंधों और टैरिफ की नीति पर भी सवाल उठाया. रूसी राजदूत के अनुसार, कुछ देश सहयोग और बातचीत के बजाय दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं. उनका दावा है कि इससे भारत को रूसी तेल से मिलने वाले आर्थिक फायदे प्रभावित हो सकते हैं.
रूसी तेल को बाजार से हटाना आसान नहीं- अलीपोव
अलीपोव ने कहा कि अगर रूसी तेल को पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार से बाहर करने की कोशिश की जाती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा. उनके मुताबिक, मौजूदा ऊर्जा बाजार के लिए रूसी तेल की उपलब्धता को नजरअंदाज करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि रूसी तेल भारत के साथ-साथ दूसरे देशों के लिए भी बाजार में बना रहेगा. रूस भारत को तेल बेचने में रुचि रखता है और भारत भी अपनी जरूरत के मुताबिक रूसी तेल खरीदने में रुचि रखता है.
भारत-रूस ऊर्जा संबंध क्यों अहम हैं?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत, सप्लाई और व्यापार पर लगने वाले प्रतिबंध भारत की ऊर्जा लागत पर असर डाल सकते हैं. रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख तेल सप्लायर में शामिल रहा है, इसलिए दोनों देशों के बीच ऊर्जा कारोबार सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार ही नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है.
