Headlines

भारत में हर चौथा कमर्शियल पायलट महिला, जानें पायलट बनने की योग्यता, ट्रेनिंग और सैलरी


Commercial Pilot: भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और उसके साथ ही कमर्शियल पायलट बनने का सपना देखने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि देश में महिला कमर्शियल पायलटों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. 30 जून 2026 तक जारी हर चार कमर्शियल पायलट लाइसेंस में लगभग एक लाइसेंस महिला उम्मीदवार को मिला. ऐसे में कई और स्टूडेंट्स भी कमर्शियल पायलट बनना चाहते हैं, लेकिन उनमें इससे जुड़ी पढ़ाई को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन देखने को मिलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कमर्शियल पायलट बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए, इसकी ट्रेनिंग कैसे होती है और शुरुआती सैलरी कितनी मिलती है. 

भारत में हर चौथा कमर्शियल पायलट महिला 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक कुल 1331 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए गए. इनमें 348 लाइसेंस महिलाओं को मिले, यानी कुल हिस्सेदारी 26.14 फीसदी रही. वहीं 2021 में 862 CPL जारी हुए थे, जिनमें 166 महिलाओं को लाइसेंस मिला था. महिला पायलटों की हिस्सेदारी के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देश में शामिल है. 

भारत और विदेश से ट्रेनिंग लेने वाले उम्मीदवार 

सरकार ने बताया कि इस साल जारी लाइसेंस में 791 उम्मीदवारों ने भारत के फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन से प्रशिक्षण लिया, जबकि 540 उम्मीदवारों ने विदेश में ट्रेनिंग पूरी की. यानी करीब 41 फीसदी लाइसेंस धारी पायलटों ने विदेशी संस्थानों से ट्रेनिंग प्राप्त की. देश में फिलहाल DGCA से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट 63 परीक्षण केंद्रों पर संचालित हो रहे हैं. इन संस्थाओं के पास 400 से ज्यादा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट उपलब्ध है. 

कमर्शियल पायलट बनने के लिए योग्यता 

कमर्शियल पायलट बनने के लिए उम्मीदवार का 12वीं फिजिक्स और मैथ्स विषय के साथ पास होना जरूरी है. इसके बाद DGCA से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल में एडमिशन लेकर ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. अगर किसी छात्र ने 12वीं में फिजिक्स या मैथ्स नहीं पढ़ा है, तो वह मान्यता प्राप्त ओपन स्कूलिंग माध्यम से इन विषयों की परीक्षा पास करके भी पात्रता हासिल कर सकता है. इसके अलावा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए, जबकि कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 18 वर्ष की आयु पूरी होना आवश्यक है. ट्रेनिंग शुरू करने से पहले DGCA का मेडिकल फिटनेस टेस्ट भी पास करना होता है. 

ये भी पढ़ें-Government Jobs 2026 : इस साल इन 3 राज्यों में आ रही है बंपर वैकेंसी, आज से ही शुरू कर दें तैयारी

कैसे मिलता है Commercial Pilot License?

कमर्शियल पायलट बनने के लिए सबसे पहले DGCA के कंप्यूटर नंबर के लिए आवेदन करना होता है. इसके बाद ग्राउंड ट्रेनिंग के दौरान एयर रेगुलेशन, एयर  नेविगेशन,  एविएशन मौसम विज्ञान और दूसरे विषयों की पढ़ाई की जाती है. DGCA की लिखित परीक्षा में निर्धारित अंक हासिल करने के बाद फ्लाइट ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. CPL के लिए न्यूनतम 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग अनिवार्य होती है. इसमें सोलो फ्लाइंग, क्रॉस कंट्री फ्लाइंग, नाइट फ्लाइंग, इंस्ट्रूमेंट फ्लाइंग और मल्टी इंजन विमान की ट्रेनिंग शामिल रहती है. सभी चरण पूरे होने और स्किल टेस्ट पास करने के बाद डीजीसीए कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी करता है. 

कितनी मिलती है सैलरी?

लाइसेंस मिलने के बाद शुरुआत में उम्मीदवार को ट्रेनिंग पायलट या फर्स्ट ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिलती है. इस दौरान सालाना 12 लाख से 25 लाख रुपये तक का पैकेज मिलता है. अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी 25 से 50 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है. वहीं कैप्टन बनने के बाद कई एयरलाइंस में सालाना पैकेज एक करोड रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में काम करने वाले सीनियर पायलटों की कमाई इससे भी ज्यादा होती है. 

सैलरी के अलावा मिलते हैं यह फायदे 

कमर्शियल पायलट को सैलरी के अलावा ट्रैवल अलाउंस, होटल में ठहरने की सुविधा, विदेश लेओवर, मुफ्त एयर टिकट और दूसरे भत्ते भी मिलते हैं. हालांकि पायलट ट्रेनिंग की लागत भी काफी ज्यादा होती है. भारत में सीपीएल ट्रेनिंग में आमतौर पर 40 से 80 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जबकि विदेश से ट्रेनिंग लेने पर यह खर्च 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा जा सकता है.

ये भी पढ़ें-राजस्थान में 24 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगा मौका 

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *