जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को सख्त करने वाला महाराष्ट्र का नया धर्मांतरण विरोधी कानून 28 अगस्त से लागू होने जा रहा है. कानून लागू होने से पहले ही इसका असर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के ईसाई समुदाय और चर्चों में दिखाई देने लगा है. वसई, विरार, मीरा-भायंदर, पालघर और ठाणे के कुछ इलाकों में चर्चों में प्रार्थना सभाओं में शामिल होने वाले लोगों से अब ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ फॉर्म भरवाए जा रहे हैं.
इस फॉर्म में व्यक्ति से यह घोषणा कराई जा रही है कि वह अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल हो रहा है और उस पर किसी तरह का दबाव, प्रलोभन, लालच, धमकी या अनुचित प्रभाव नहीं है. इसमें यह भी दर्ज किया जाता है कि चर्च जाने का फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत और स्वैच्छिक है. कुछ जगहों पर फॉर्म के साथ पासपोर्ट साइज फोटो और आधार या पैन कार्ड का विवरण भी मांगा जा रहा है. चर्च से जुड़े लोगों के मुताबिक, पिछले करीब एक महीने से इस तरह के फॉर्म अलग-अलग इलाकों में वितरित किए जा रहे हैं.
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प्रार्थना सभाओं में विवाद के बाद उठाया कदम
चर्च से जुड़े समूहों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में प्रार्थना सभाओं में हुए विवाद और व्यवधान के बाद यह व्यवस्था शुरू की गई है. अप्रैल से जुलाई के बीच प्रार्थना सभाओं से जुड़े पांच मामलों में कुल नौ FIR दर्ज होने की बात सामने आई है.
आमतौर पर रविवार को किराए के हॉल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल या निजी घरों में प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं. चर्च से जुड़े लोगों का आरोप है कि कुछ मौकों पर खुद को बजरंग दल या विश्व हिंदू परिषद (VHP) का कार्यकर्ता बताने वाले लोग वहां पहुंचकर धर्मांतरण का आरोप लगाते हैं. इसके बाद पुलिस को बुलाया जाता है और दोनों पक्षों को थाने ले जाया जाता है. कुछ मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज हुई.
वसई में प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा, पांच FIR
12 अप्रैल को वसई ईस्ट के धीरज शॉपिंग सेंटर में आयोजित रविवार की प्रार्थना सभा में करीब 100 से 150 लोग मौजूद थे. इसी दौरान कुछ लोग, जिनमें बजरंग दल के सदस्य भी शामिल थे, वहां पहुंचे और सभा में व्यवधान डाला. इसके बाद अगले 24 घंटे के भीतर अचोले पुलिस स्टेशन में पांच FIR दर्ज की गईं.
इनमें चार प्राथमिकी प्रार्थना सभा आयोजित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ, जबकि एक कथित तौर पर सभा में पहुंचकर आरोप लगाने वालों के खिलाफ दर्ज हुई. इन्हीं घटनाओं के बाद चर्च से जुड़े लोग ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ फॉर्म को संभावित कानूनी विवाद की स्थिति में एक तरह के दस्तावेजी सुरक्षा उपाय के तौर पर देख रहे हैं.
चर्च में रखा जाएगा फॉर्म, भविष्य में सबूत के तौर पर इस्तेमाल की तैयारी
वसई के एक पादरी के मुताबिक, इस महीने एक रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान करीब 30 लोगों को यह फॉर्म दिया गया. उनसे फॉर्म भरकर पासपोर्ट साइज फोटो लगाने और अगले रविवार को इसे जमा करने के लिए कहा गया. पादरी के अनुसार, लगातार हो रहे विवादों और प्रार्थना सभाओं में व्यवधान को देखते हुए यह रिकॉर्ड रखा जा रहा है.
उनका कहना है कि यदि भविष्य में किसी व्यक्ति पर जबरन या दबाव डालकर प्रार्थना सभा में शामिल कराने का आरोप लगाया जाता है, तो चर्च के पास यह दिखाने के लिए दस्तावेज मौजूद होगा कि संबंधित व्यक्ति अपनी इच्छा से वहां आया था. चर्च से जुड़े लोगों के अनुसार, हाल की घटनाओं के बाद पादरियों और अन्य पदाधिकारियों ने कई बैठकें भी की हैं.
उनका आरोप है कि कुछ मामलों में विवाद या कथित हिंसा करने वालों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में वे इन फॉर्म को भविष्य में संभावित कानूनी कार्रवाई के दौरान अपने पक्ष में रिकॉर्ड के रूप में रखना चाहते हैं.
बजरंग दल का दावा- कानून के दायरे में हो रहा काम
बजरंग दल के कोंकण क्षेत्र के सह-संयोजक गौतम रावरिया ने कहा कि संगठन सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजित होने वाली प्रार्थना सभाओं पर नजर रखता है और किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को देता है. रावरिया के मुताबिक, उनके संगठन के सदस्यों के खिलाफ भी FIR दर्ज हुई हैं.
उन्होंने कहा कि यदि उनके कार्यकर्ताओं पर हमला होता है तो वे आत्मरक्षा करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रार्थना समूह पहले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करते हैं और बाद में उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जाता है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
रक्षाबंधन के दिन से प्रभावी होगा नया कानून, क्या हैं प्रावधान?
महाराष्ट्र सरकार ने नए धर्मांतरण विरोधी कानून को 31 जुलाई को अधिसूचित किया था और इसके प्रावधान 28 अगस्त से प्रभावी होंगे. कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी, बल, धमकी, गलत जानकारी, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के जरिए कराए गए धर्मांतरण को अपराध के दायरे में लाता है.
कानून में विवाह या विवाह के वादे के माध्यम से कराए गए कथित धर्मांतरण से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं. धर्मांतरण स्वैच्छिक होने को साबित करने की जिम्मेदारी प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति पर रखी गई है. यदि कथित धर्मांतरण में नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति अथवा मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति शामिल है, तो कानून में अपेक्षाकृत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.
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