उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने पंचायत चुनावों में देरी पर समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. संभावना है कि यूपी विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव आयोजित कराए जाएंगे.
इन सबके बीच ओपी राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने सलाहकारों और वकीलों के माध्यम से अदालत में एक मामला दायर किया. एक बार जब यह मामला न्यायपालिका के पास चला गया, तो अब जो कुछ भी होगा, वह अदालत के निर्देशों के अनुसार ही होगा.
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का आदेश दिया था, और उसी के अनुरूप सरकार ने आयोग का गठन किया. एक समिति भी गठित की गई है और वह अपना काम कर रही है. अदालत द्वारा जो भी आदेश जारी किया जाएगा, उसे लागू किया जाएगा.
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26 मई को प्रधानों के कार्यकाल खत्म
बता दें उत्तर प्रदेश में 26 मई को ही ग्राम प्रधानों के कार्यकाल के खत्म हो गए हैं. कार्यकाल खत्म होने के बाद सभी ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर नियुक्ति दे दी गई है कि हालांकि नीतिगत फैसलों में उन्हें जिलाधिकारी/ कलेक्टर की मंजूरी लेनी होगी.
माना जा रहा था कि पंचायत चुनाव फरवरी से अप्रैल के दौरान हो जाएंगे लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की देरी के चलते प्रक्रिया धीमी होती चली गई. इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं और फिर मामला अदालती हो गया.
उधर, योगी सरकार ने मई के दूसरे हफ्ते में कैबिनेट से पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी और तीसरे हफ्ते में आयोग के सदस्यों का ऐलान हुआ. यह आयोग छः महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. उसके बाद आपत्तियों की सुनवाई होगी और आखिर में आरक्षण तय होगा.
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इन सब प्रक्रियाओं में कम से कम 6-8 महीने लग सकते हैं. ऐसे में यह तय है कि यूपी के पंचायत चुनाव विधानसभा के बाद ही होंगे.
