केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने कहा है कि लाभार्थियों को उनके आधार नंबर के आधार पर भुगतान करने की मौजूदा व्यवस्था की जगह जल्द ही एक ऐसी प्रणाली लाई जाएगी, जिसमें बायोमेट्रिक्स और वोटर आईडी (EPIC) नंबर का इस्तेमाल करके भुगतान किया जाएगा.
पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने पंचायती राज मंत्रालय की तरफ से आयोजित ‘पीपल्स प्लान कैंपेन 2026-27’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान कहा, “एक बात कहना चाहते हैं कि अब आधार लाभार्थियों को भुगतान करने का जो आधार है, वह आधार कार्ड नहीं रहेगा. आधार कार्ड, अब आधार कार्ड बनाने वाली जो संस्थाएं हैं, वह हर गली में उपलब्ध हैं. आप जिसका कहिए, अभी 5 मिनट में आधार कार्ड बनाकर तैयार कर देंगे.”
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ललन सिंह ने कहा, “वो आधार कार्ड अब आधार नहीं रहेगा. जो भी लाभार्थी हैं, उनके लिए बायोमेट्रिक और उनका जो वोटर आईडी का ईपीआईसी नंबर है, वो उसका आधार होगा, और उसी पर उनका भुगतान होगा.”
कांग्रेस का निशाना
उनके इस बयान पर कांग्रेस ने कहा है कि यही तो शुरू से योजना थी. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा, ”SIR प्रक्रिया के जरिए पहले ही कम से कम 13.3 करोड़ भारतीयों को मतदाता सूची से हटाया जा चुका है. अब वोटर आईडी न होने को आधार बनाकर लोगों को राशन, आवास, स्वास्थ्य बीमा और रोज़गार की गारंटी जैसी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है.”
Union Minister Lalan Singh has said that Aadhaar will be replaced by voter IDs. This was the plan all along. The SIR exercise has already removed at least 13.3 crore Indians from the electoral rolls. Now the absence of a voter ID is being floated as grounds to deny ration, housing, health insurance and guaranteed employment. This is the larger design. First, strip people of their political voice by deleting them from the rolls. Then strip them of their welfare entitlements for not being on them. The result: millions of Indians pushed out of both the democratic and the welfare framework, reduced to second-class citizens, denied rights that are theirs as citizens.
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) November 5, 2026
उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी साजिश है. पहले, लोगों को मतदाता सूची से हटाकर उनकी राजनीतिक आवाज छीन ली जाती है. फिर, सूची में नाम न होने का हवाला देकर उन्हें कल्याणकारी योजनाओं के हक से भी वंचित कर दिया जाता है.
पवन खेड़ा ने कहा, ”नतीजा यह होता है कि लाखों भारतीय लोकतांत्रिक और कल्याणकारी व्यवस्था, दोनों से बाहर हो जाते हैं. वे दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह जाते हैं और उन्हें उन अधिकारों से भी वंचित कर दिया जाता है, जो एक नागरिक के तौर पर उनके पास होने चाहिए.”
