- बिश्नोई गिरोह जबरन वसूली, हिंसा के कारण गैंगस्टर कहलाता है।
Attack On Tiger Shroff: रविवार शाम को मुंबई के जुहू इलाके में एक फुटबॉल ग्राउंड से निकलते वक्त बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की बीएमडब्ल्यू गाड़ी पर गोलीबारी हुई. बाद में एक ऑडियो क्लिप सामने आई जिसमें अनिल पंडित नाम के एक व्यक्ति ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. आपको बता दें कि अनिल पंडित कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा हुआ है.
इस घटना ने गैंगस्टर और डॉन के बीच के अंतर पर फिर से ध्यान खींचा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कानून परिवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में बिश्नोई को एक गैंगस्टर माना जाता है. आइए जानते हैं कि दोनों के बीच क्या फर्क होता है?
अपराध के दो अलग-अलग नाम
ये शब्द आपराधिक गतिविधियों, प्रभाव और संगठन के अलग-अलग तरीकों को दर्शाते हैं. एक गैंगस्टर मुख्य रूप से सीधी हिंसा, जबरन वसूली और हत्याओं को अंजाम देने से जुड़ा होता है. इसके उलट एक डॉन सीधी हिंसा पर कम और अवैध व्यापार, बड़े पैमाने पर तस्करी, सट्टेबाजी और एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाने पर ज्यादा निर्भर होता है.
इनके नेटवर्क भी अलग-अलग होते हैं. एक गैंगस्टर के साथी अक्सर स्थानीय या फिर क्षेत्रीय स्तर के लोग और ऐसे शूटर होते हैं जो पैसे और कुख्याति पाने के लिए काम करते हैं. वहीं एक डॉन का नेटवर्क काफी ज्यादा कॉरपोरेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर का होता है. इसमें बड़े व्यवसायी, राजनेता और व्हाइट कॉलर लोग शामिल हो सकते हैं.
अधिकारियों के साथ संबंध और इनकम के स्रोत
गैंगस्टर अक्सर पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सीधे टकराव में रहते हैं और उन्हें कई साल जेल में बिताने पड़ सकते हैं. इसके उलट एक डॉन सिस्टम के अंदर गहरी पैठ बनाने की कोशिश करता है और राजनीतिक या फिर आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल करके पर्दे के पीछे से अपना काम चलाता है. उनके वित्तीय स्रोतों में भी अंतर है. गैंगस्टर को आमतौर पर जबरन वसूली और सीधी धमकियों के जरिए से पैसा मिलता है.
एक डॉन काफी बड़ा वित्तीय साम्राज्य खड़ा करता है. वह रियल एस्टेट, फिल्म उद्योग और होटल चेन में निवेश करता है. इसी के साथ बड़े वित्तीय घोटाले को भी अंजाम देता है. ऐसा व्यक्ति सार्वजनिक रूप से हिंसक घटनाओं से जुड़ने के बजाय खुद को एक प्रभावशाली व्यवसायी या फिर पावर ब्रोकर के रूप में पेश करने की कोशिश करता है. दूसरी तरफ गैंगस्टर अपनी साख मजबूत करने और लोगों की नजरों में बने रहने के लिए अक्सर अपराधों की जिम्मेदारी लेता है.

बिश्नोई को गैंगस्टर क्यों माना जाता है?
रिपोर्ट के मुताबिक कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियां लॉरेंस बिश्नोई को एक गैंगस्टर मानती हैं. इसने जेल में रहते हुए भी एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट तैयार कर लिया है. एक वजह यह है कि यह गिरोह कथित तौर पर सीधी हिंसा और जबरन वसूली पर निर्भर है. ऐसा बताया जाता है कि यह गिरोह व्यापारियों, अभिनेताओं और गायकों से पैसे की मांग करता है और मांग पूरी न होने पर हत्या कर सकता है.
इस गिरोह की हिंसक छवि के उदाहरण के तौर पर सिद्धू मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी की हत्याओं का जिक्र किया गया है. एक और पहलू यह है कि यह गिरोह शूटरों पर काफी ज्यादा निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई गिरोह के पास 700 से ज्यादा शूटर हैं.
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जेल से संचालन
रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई 2015 से भारत की अलग-अलग जेलों में बंद है. जेल में होने के बावजूद वह मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित कॉल के जरिए निर्देश देकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिलवाता रहता है. टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले ने इस चर्चा को फिर से हवा दे दी है. अनिल पंडित के नाम से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप में इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है.
एक गैंगस्टर मुख्य रूप से डराने धमकाने, जबरन वसूली, शूटर और सीधी हिंसा का सहारा लेता है. वहीं एक डॉन का संबंध व्यापक वित्तीय नेटवर्क, अवैध कारोबार और परदे के पीछे से प्रभाव डालने से होता है. बिश्नोई को एक गैंगस्टर माना जाता है क्योंकि उसका गिरोह मुख्य रूप से जबरन वसूली, हिंसक वारदात और शूटरों के एक बड़े समूह पर टिका है.
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