श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में कथित 550 करोड़ रुपये के ‘नकली चांदी’ के चढ़ावे के मामले की जांच के लिए कोर्ट ने पुलिस को और समय दिया है. सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट को बताया कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के कुछ सीनियर अधिकारियों के बयान अभी रिकॉर्ड किए जाने बाकी हैं, ये बयान जांच के लिए काफी अहम हैं.
पुलिस ने यह भी बताया है कि धातु के चढ़ावे के कलेक्शन, अलग करने, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग से जुड़े 116 पेज के ऑफिशियल रिकॉर्ड और कई CCTV और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक डेटा मिला है, जिनकी जांच चल रही है. ये खुलासा 19 सितंबर को जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, भवन की तरफ किया गया है, जिन्होंने जांच से जुड़ी अपडेट कोर्ट के समक्ष रखी थी.
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अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को
सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्चा एडवोकेट दीपक शर्मा खुद पेश हुए थे. वहीं, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) की रिपोर्ट पेश की. कोर्ट ने रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद फैक्ट्स और ग्राउंड्स के आधार पर जांच के लिए और समय दिया है. इसके साथ ही पुलिस को जांच आगे बढ़ाने की इजाजत दी. मामला अब 10 अक्टूबर, 2026 के लिए लिस्ट किया गया है.
9 मई को दर्ज की गई थी शिकायत
दरअसल, दीपक शर्मा ने 9 मई 2026 को क्राइम ब्रांच में इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में FIR दर्ज करने और श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र मंदिर में चढ़ाए गए लगभग 20 टन चांदी के चढ़ावे में कथित मिलावट, बदलाव, चोरी और संभावित गलत इस्तेमाल की निष्पक्ष और साइंटिफिक जांच की मांग की थी. इस 20 टन चांदी का बाजार मूल्य करीब 550 करोड़ रुपए बताया गया था.
स्टेटस रिपोर्ट में क्या है?
पुलिस द्वारा तैयर किए गए स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में कई प्रमुथ पक्षों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनमें श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अधिकारी, सुरक्षा कर्मी, पुजारी, भवन में तैनात CRPF के जवान, J&K पुलिस के ऑन-ड्यूटी अधिकारी के बयान शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि बयानों के आधार पर भवन परिसर के अंदर स्ट्रॉन्ग रूम/स्टोर में ‘सफेद धातु’ को इकट्ठा करने, उसे संभालने, अलग करने और स्टोर करने के लिए अपनाए गए प्रोसेस का पता चल चुका है.
SMVDSB के जॉइंट चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को लिखा पत्र
खास बात यह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि भवन में श्राइन बोर्ड के कुछ सीनियर और संबंधित अधिकारियों के बयान अभी भी रिकॉर्ड किए जाने बाकी हैं, जो केस के लिए काफी अहम हैं. APP ने कोर्ट को आगे बताया कि संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और पेश करने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) के जॉइंट चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को पत्र लिखा गया था. इस पत्र में संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और उसे पेश करने की मांग की गई.
CCTV फुटेज में चढ़ावे से जुड़ी जानकारी
बताया जा रहा है कि इस CCTV फुटेज से धातु के चढ़ावे से जुड़े पूरे प्रोसेस के बारे में जानकारी मिल जाएगी, जिसमें चढ़ावे को इकट्ठा करना, अलग करना, स्ट्रॉन्ग रूम/स्टोर में स्टोर करना, भवन से कटरा तक ट्रांसपोर्टेशन और उसके बाद का प्रोसेस शामिल है. इसके अलावा पत्र में पुलिस ने चढ़ावे की हैंडलिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग से जुड़े संबंधित ऑर्डर, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर, नियम, गाइडलाइन और तय प्रोसीजर भी पेश करने की मांग शामिल है.
भारत सरकार की टकसाल (सरकारी कारखाना) से जुड़े रिकॉर्ड भी श्राइन बोर्ड से संभालकर रखने और जांच के लिए मांगे गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के लेटर के जवाब में दिया गया मटीरियल 18 अगस्त को मिला था. इसमें 116 पेज का मटीरियल है, जिनमें धातु के चढ़ावे की हैंडलिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग से जुड़े ऑर्डर, SOP, प्रोसीजर और रिकॉर्ड हैं.
सबूतों की होगी सिस्टमैटिक जांच, मांगा और समय
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि CCTV और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक डेटा काफी मात्रा में है और इसकी डिटेल और सिस्टमैटिक जांच की जाएगी. पुलिस के मुताबिक, फुटेज को ध्यान से देखा जाना चाहिए ताकि संबंधित घटनाओं, लोगों, मूवमेंट और सीक्वेंस की पहचान की जा सके और उसके बाद संबंधित लोगों के बयानों और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए डॉक्यूमेंट्री मटीरियल से मिलाया जा सके.
डॉक्यूमेंट्री और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की संख्या का हवाला देते हुए, DySP ने स्क्रूटनी, वेरिफिकेशन और फाइनल जांच रिपोर्ट जमा करने के लिए और समय मांगा. खास बात यह है कि शिकायत की जांच चार महीने से अधिक समय से चल रही है, फिर भी स्टेटस रिपोर्ट में FIR दर्ज होने का खुलासा नहीं है.
शिकायतकर्ता ने कोर्ट को क्या बताया?
एडवोकेट दीपक शर्मा ने कहा, “पुलिस ने अब कोर्ट के सामने फॉर्मली बताया है कि काफी डॉक्यूमेंट्री और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं, कई कैटेगरी के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की जांच की गई है, और पूरी जांच के लिए जरूरी माने गए श्राइन बोर्ड के सीनियर अधिकारियों के बयान अभी भी रिकॉर्ड किए जाने बाकी हैं. ”
शर्मा ने आगे कहा, “यह रिपोर्ट प्रगति को दिखाती है, लेकिन इससे ये भr साफ है कि जांच अभी अधूरी है. इस मामले में सुपरविजन, कस्टडी, ट्रांसपोर्टेशन, प्रोसेसिंग, अकाउंटिंग और संस्थागत निर्णय लेने के लिए ज़िम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों की जांच होनी चाहिए ताकि हर स्तर पर हर किसी की जिम्मेदारी तय हो सके.
सबूतों को सुरक्षित रखने की अपील
उन्होंने आगे कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा जाए. असली फिजिकल मटीरियल, सैंपल, बचे हुए हिस्से, बनी हुई बार्स (सोने/धातु की ईंटें), CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, मिंट (टकसाल) के दस्तावेज, ऑडिट रिकॉर्ड और चेन-ऑफ-कस्टडी मटीरियल को सुरक्षित रखा जाए ताकि इन्हें बदलाव, पिघलाने, ट्रांसफर, नष्ट करने, डिलीट करने या ओवरराइटिंग से बचाया जा सके.
शर्मा ने आगे कहा कि आरोपों की अभी जांच और न्यायिक रूप से पुष्टि होनी बाकी है. FIR दर्ज करने और निष्पक्ष, व्यापक और वैज्ञानिक जांच की मांग वाली लंबित याचिका पर कानून के अनुसार सक्षम अदालत के समक्ष कार्यवाही जारी रहेगी. “
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