Headlines

शशि थरूर को कभी निकाला गया था बाहर, अब वही क्लब फिर विवादों में- इंटरनेट पर छिड़ी बहस


देश में पुराने एलीट क्लब्स और उनकी परंपराओं को लेकर छिड़ी बहस के बीच अब Breach Candy Club एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. दिल्ली के जिमखाना क्लब विवाद के बाद सोशल मीडिया पर जब देश के अन्य प्राइवेट क्लब्स की पड़ताल शुरू हुई, तो मुंबई का यह अल्ट्रा-एक्सक्लूसिव क्लब चर्चा के केंद्र में आ गया. वजह है इसकी मेंबरशिप से जुड़ा एक चौंकाने वाला नियम, जिसके मुताबिक 2026 में भी “ट्रस्ट मेंबरशिप” सिर्फ यूरोपियन पासपोर्ट धारकों तक सीमित बताई जा रही है. आजादी के दशकों बाद भी ऐसे नियमों का बने रहना अब सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से और हैरानी की बड़ी वजह बन गया है.

शशि थरूर के साथ हुई घटना भी हो रही वायरल

इस पूरे विवाद के बीच Shashi Tharoor का एक पुराना अनुभव भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. अपने एक ब्लॉग में उन्होंने बताया था कि 1960 के दशक में वह एक अमेरिकी दोस्त के साथ क्लब गए थे, लेकिन उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया. उन्होंने लिखा था कि उन्हें “बाहर निकाल दिया गया”, क्योंकि वह भारतीय थे. यह घटना आजादी के करीब 20 साल बाद की बताई गई है, जो अब फिर से चर्चा में है और लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या वाकई हालात पूरी तरह बदले हैं या नहीं.

क्लब का इतिहास और विवाद की जड़

1878 में ब्रिटिश दौर में स्थापित इस क्लब की शुरुआत यूरोपियन लोगों के लिए एक खास रिक्रिएशनल स्पेस के तौर पर हुई थी. बाद में 1960 के दशक में भारतीयों के लिए मेंबरशिप खोली गई, लेकिन असली ताकत आज भी “ट्रस्ट मेंबर्स” के पास ही मानी जाती है. 1967 में सिटी सिविल कोर्ट से मंजूर संविधान के तहत ट्रस्ट मेंबरशिप केवल “यूरोपियन इनहैबिटेंट्स ऑफ बॉम्बे” तक सीमित रखी गई, जिनके पास क्लब की गवर्निंग बॉडी, फाइनेंस और पॉलिसी से जुड़े फैसलों का पूरा अधिकार होता है. यही व्यवस्था अब विवाद की असली वजह बन गई है, क्योंकि इसे औपनिवेशिक सोच का बचा-खुचा ढांचा बताया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: Indian Viral Story: दादी को पहली बार माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस ले गया पोता, भावुक कर देगी ये वायरल कहानी

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई यूजर्स ने इसे “नया नहीं, बल्कि पुराना नस्लभेद” करार दिया और सवाल उठाया कि आखिर भारत में ऐसे नियम अब तक क्यों कायम हैं. कुछ लोगों ने लिखा कि “अगर 2026 में भी यूरोपियन पासपोर्ट जरूरी है, तो यह आजादी का मजाक है”. वहीं कुछ यूजर्स ने क्लब की परंपरा और निजी संस्था होने का हवाला देते हुए इसे उनका आंतरिक मामला बताया. कुल मिलाकर, यह विवाद अब सिर्फ एक क्लब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश में एलीट कल्चर और बराबरी के अधिकारों पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है.

यह भी पढ़ें: Viral Video: जनगणना की ट्रेनिंग के बीच पहुंचा लंगूर, यूजर्स बोले- स्पेशल विजिट; वीडियो वायरल



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *