हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में प्रकृति का भीषण कहर देखने को मिला है. रोजी-रोटी कमाने गए मजदूरों के लिए मंगलवार का दिन एक बड़ा दुस्वप्न साबित हुआ. कमरऊ तहसील के बागनाधार में स्थित चूना पत्थर खदान (Limestone Mine) में अचानक एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसने पलक झपकते ही तबाही मचा दी. इस भयानक हादसे में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक कर खदान में जा गिरा, जिसकी चपेट में आकर तीन डंपर और उनके चालक भारी मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए. घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
मलबे में दबे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को मौके पर तैनात कर दिया. बीते कल ही रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था, लेकिन खराब मौसम और रुक-रुक कर गिर रहे मलबे ने बचाव कार्य में बड़ी बाधा उत्पन्न की. आज सुबह मौसम साफ होते ही रेस्क्यू ऑपरेशन फिर से पूरी ताकत और युद्ध स्तर पर तेज कर दिया गया है.
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एक शव बरामद, दो नेपाली मजदूर अब भी लापता
ग्राउंड जीरो पर मौजूद सिरमौर की जिलाधिकारी (DC) प्रियंका वर्मा ने हालात की जानकारी देते हुए बताया कि कड़ी मशक्कत के बाद एनडीआरएफ की टीम ने मलबे से एक व्यक्ति का शव बरामद कर लिया है. मृतक स्थानीय निवासी बताया जा रहा है. वहीं, मलबे में दबे दो अन्य चालक जो नेपाली मूल के हैं, वे अभी भी लापता हैं. प्रशासन ने उनके परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की सूचना दे दी है, जो खौफ और आंसू भरी आंखों से अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
डीसी की निगरानी में चल रहा ऑपरेशन
डीसी प्रियंका वर्मा खुद रेस्क्यू टीमों के साथ मौके पर डटी हुई हैं और हर एक पल की गतिविधि पर बारीक नजर रख रही हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही मलबे में दबे दो अन्य लोगों को भी ढूंढ निकाला जाएगा. एनडीआरएफ के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर टन भर मलबे को हटाने और लापता मजदूरों तक पहुंचने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं. इस दर्दनाक हादसे ने पहाड़ में खनन कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
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