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सेना में जाने का जुनून ऐसा, लाखों का पैकेज छोड़ स्पर्श छेत्री ने चुनी वर्दी


स्पर्श छेत्री का परिवार लंबे समय से सैन्य सेवा से जुड़ा रहा है. उनके परदादा ब्रिटिश इंडियन आर्मी में रहे थे. इसके बाद उनके दादा और पिता ने इन्फेंट्री ऑफिसर के रूप में सेना में सेवा दी. उनकी मां भी आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स का हिस्सा रही. इस तरह से सेना और वर्दी स्पर्श के लिए बचपन से ही परिवार की जिंदगी का हिस्सा रही.

घर के माहौल में उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और साहस और देश सेवा जैसे मूल्यों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला. इसी पारिवारिक माहौल की वजह से सेना में जाने का विचार उनके लिए नया सपना नहीं था. हालांकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेक्नोलॉजी क्षेत्र से की.

घर के माहौल में उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और साहस और देश सेवा जैसे मूल्यों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला. इसी पारिवारिक माहौल की वजह से सेना में जाने का विचार उनके लिए नया सपना नहीं था. हालांकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेक्नोलॉजी क्षेत्र से की.

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्पर्श छेत्री ने कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया. टेक्निकल एजुकेशन के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में कदम रखा और एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर डेटा एनालिस्ट के तौर पर काम किया.

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्पर्श छेत्री ने कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया. टेक्निकल एजुकेशन के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में कदम रखा और एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर डेटा एनालिस्ट के तौर पर काम किया.

यह एक ऐसा अवसर था, जिसमें स्थिरता और प्रोफेशनल ग्रोथ के अवसर थे. इसके बावजूद स्पर्श का झुकाव सैन्य जीवन की ओर बना रहा, जिसे उन्होंने अपने परिवार में पीढ़ियों से देखा. ऐसे में उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़ भारतीय सेना में से अधिकारी बनने का फैसला लिया.

यह एक ऐसा अवसर था, जिसमें स्थिरता और प्रोफेशनल ग्रोथ के अवसर थे. इसके बावजूद स्पर्श का झुकाव सैन्य जीवन की ओर बना रहा, जिसे उन्होंने अपने परिवार में पीढ़ियों से देखा. ऐसे में उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़ भारतीय सेना में से अधिकारी बनने का फैसला लिया.

सेना में जाने से पहले ट्रेनिंग के दौरान स्पर्श ने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई. वह कई खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी रहे. स्पर्श राष्ट्रीय स्तर के घुड़सवारी पदक विजेता रह चुके. इसके अलावा उन्होंने जिला स्तर पर बैडमिंटन और तैराकी में भी पदक हासिल किया.

सेना में जाने से पहले ट्रेनिंग के दौरान स्पर्श ने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई. वह कई खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी रहे. स्पर्श राष्ट्रीय स्तर के घुड़सवारी पदक विजेता रह चुके. इसके अलावा उन्होंने जिला स्तर पर बैडमिंटन और तैराकी में भी पदक हासिल किया.

स्पर्श की सैन्य तैयारी का जुड़ाव केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं था. वह एनसीसी का हिस्सा भी रह चुके थे. ऐसे में सेना में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्पर्श फिलहाल ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी गया में ट्रेनिंग ले रहे हैं. उन्हें यहां बटालियन अंडर ऑफिसर की जिम्मेदारी दी है.

स्पर्श की सैन्य तैयारी का जुड़ाव केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं था. वह एनसीसी का हिस्सा भी रह चुके थे. ऐसे में सेना में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्पर्श फिलहाल ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी गया में ट्रेनिंग ले रहे हैं. उन्हें यहां बटालियन अंडर ऑफिसर की जिम्मेदारी दी है.

बटालियन अंडर ऑफिसर का पद कैडेट्स के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा होता है. इस भूमिका में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन टीम के साथ काम करने और साथ क्रेडिट के बीच समन्वय बनाने की क्षमता का इस्तेमाल करना होता है.

बटालियन अंडर ऑफिसर का पद कैडेट्स के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा होता है. इस भूमिका में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन टीम के साथ काम करने और साथ क्रेडिट के बीच समन्वय बनाने की क्षमता का इस्तेमाल करना होता है.

बटालियन की कहानी में एक तरफ चार पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, तो दूसरी तरफ अपनी पसंद से चुना गया रास्ता. इसमें स्पर्श ने कॉर्पोरेट करियर की सुविधा के बजाय भारतीय सेना को चुना और अब देश सेवा के लिए अधिकारी के रूप में अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.

बटालियन की कहानी में एक तरफ चार पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, तो दूसरी तरफ अपनी पसंद से चुना गया रास्ता. इसमें स्पर्श ने कॉर्पोरेट करियर की सुविधा के बजाय भारतीय सेना को चुना और अब देश सेवा के लिए अधिकारी के रूप में अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.

Published at : 06 Sep 2026 08:01 AM (IST)

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