सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ का अंतिम दृश्य तेजी से वायरल हो रहा है. कम बजट में बनी इस आध्यात्मिक फिल्म के क्लाइमेक्स ने दर्शकों को भावुक कर दिया है.
वायरल रील में दिखाए गए दृश्य के अनुसार, मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के समय जो घटा, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं.
क्या है वायरल वीडियो में?
वायरल क्लिप फिल्म के उस चरम क्षण को दर्शाती है, जहाँ बाल संन्यासी ‘लक्ष्मण’ की कठोर तपस्या और नीम करौली बाबा के रूप में उनकी लीला अपने पूर्ण स्वरूप में प्रकट होती है:
नेत्रोन्मीलन का पावन क्षण: वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच जैसे ही मुख्य विग्रह की आंखों से पट्टी खोली जाती है, वातावरण पूरी तरह बदल जाता है.
साक्षात हनुमान जी की चेतना: विग्रह के अनावरण के साथ ही स्क्रीन पर एक अलौकिक तेज और ऊर्जा का प्रवाह दिखाई देता है. वीएफएक्स और कैमरे के तालमेल से ऐसा लगता है मानो उस पाषाण मूर्ति में साक्षात बजरंगबली का अंश उतर आया हो.
भक्त और भगवान का एकाकार रूप: नीम करौली बाबा को भक्त कलयुग में हनुमान जी का ही स्वरूप मानते हैं. जब बाबा विग्रह के सम्मुख खड़े होकर मौन दृष्टि डालते हैं, तो उस दृश्य में भक्त और भगवान के बीच का अंतर पूरी तरह मिटता दिखाई देता है.
श्रद्धालुओं के रोंगटे खड़े होने की 3 बड़ी वजहें
आस्था और साधना का फल: कहानी एक बालक के अपनी दिवंगत माता के प्रति विरह से शुरू होकर भगवान की खोज और जनसेवा की ओर मुड़ती है. प्राण-प्रतिष्ठा का यह दृश्य उस पूरी साधना की फलश्रुति बनकर सीधे दिल को छू जाता है.
दिव्य संगीत और वातावरण: पृष्ठभूमि में गूंजते संस्कृत श्लोक, नगाड़ों की थाप और गंभीर संगीत मन में एक आध्यात्मिक स्पंदन पैदा करते हैं.
कैंची धाम का आध्यात्मिक इतिहास: यह दृश्य श्रद्धालुओं को वर्ष 1964 की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब बाबा महाराज जी के पावन सान्निध्य में कैंची धाम में हनुमान जी के विग्रह की प्रतिष्ठा हुई थी.
सोशल मीडिया पर ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारे
इंस्टाग्राम पर वायरल इस वीडियो के कमेंट बॉक्स में लाखों भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं. कोई इसे ‘साक्षात प्रभु दर्शन’ कह रहा है, तो कोई इसे सनातन संस्कृति की सबसे शुद्ध और सात्विक प्रस्तुति बता रहा है.
“जब विग्रह की आंखें खुलीं, तो आंखें नम हो गईं. ऐसा लगा जैसे पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि स्वयं मारुतिनंदन सामने खड़े होकर आशीर्वाद दे रहे हों.” (एक श्रद्धालु का कमेंट)
यही वजह है कि बिना किसी भारी-भरकम प्रचार के, केवल इस एक अलौकिक दृश्य के प्रभाव से यह फिल्म सोशल मीडिया पर खूब साझा की जा रही है. भक्त इसे अपने स्टेटस और स्टोरीज पर शेयर कर प्रभु के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर रहे हैं.
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