कांग्रेस ने 1 अप्रैल को मानहानि के मामले में पार्टी नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि कानून सर्वोपरि है, चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने से संबंधित मामले में पवन खेड़ा को यह कहते हुए अग्रिम जमानत दे दी कि मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा लगता है.
कांग्रेस ने हिमंत बिस्वा सरमा से की अपील
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हम सभी को याद दिलाता है कि जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता दांव पर होती है तो अदालतें ही हमारी आशा का अंतिम आधार बनी रहती हैं. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री से भी आग्रह किया कि वह इस पर पुनर्विचार करें कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए पवन खेड़ा के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग करना उचित है और उन्हें इस पर खेद व्यक्त करना चाहिए. सिंघवी ने पूछा, ‘मैं हाथ जोड़कर असम के मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि क्या वह वास्तव में कोर्ट के फैसले के बाद अपने रुख पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते?’
पवन खेड़ा को परेशान करना था उद्देश्य: सिंघवी
सिंघवी ने कहा कि यह मामला हमें याद दिलाता है कि जब प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का मामला हो तो गिरफ्तारी पहला नहीं, बल्कि अंतिम उपाय होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में स्पष्ट मंशा चुनाव प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों के लिए पवन खेड़ा को अपमानित और परेशान करना था. कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री के बयान को तीन पन्नों में उद्धृत किया है, जबकि ऐसी कई बातें हैं जिनका न तो न्यायालय उल्लेख कर सकता है और न ही कोई उनके बारे में बोल सकता है.
सिंघवी ने कहा, ‘मैं असम के मुख्यमंत्री से आग्रह करूंगा कि वह सोमवार के परिणाम की परवाह किए बिना अपने रुख पर पुनर्विचार करें. असम के मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए कि क्या संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के लिए ऐसा करना उचित है? मैं चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री इस मामले पर गंभीरता से विचार करें और खेद व्यक्त करें. यदि वे खेद व्यक्त करते हैं तो उनका कद ही बढ़ेगा.’
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Input By : पीटीआई भाषा
