पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अखंड भारत और हिंदू को लेकर बड़ा बड़ा बयान दिया है. उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की तुलना भारत से करते हुए कहा कि हम अपने यहां हिंदू को ‘बर्दाश्त’ करते हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय ‘अखंड भारत’ में विश्वास करते हैं, लेकिन हम मुसलमान हैं वे नहीं, फिर भी हम ऐसी सोच वाले मुसलमान हैं जो दूसरों को बर्दाश्त करते हैं.
अखंड भारत में विश्वास रखते भारतीय: जरदारी
जरदारी का ये बयान ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार के साथ-साथ सेना के खिलाफ बगावत की आग भड़की हुई है और मानवाधिकार के हनन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत हो रही है. उन्होंने कहा,’ भारतीय अखंड भारत में विश्वास रखते हैं, लेकिन पाकिस्तान की मुस्लिम मानसिकता दूसरों को बर्दाश्त और स्वीकार करने की है. पाकिस्तान में रहने वाली 4 फीसदी हिंदू आबादी पूरी तरह से आजाद हैं और वे भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना ज्यादा पसंद करेंगे.’
पाकिस्तानी राष्ट्रपति अपने देश में रहने वाले हिंदुओं को लेकर कुछ भी दावे करें, लेकिनअंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने उनकी पोल खोल दी. यूरोपीय कंट्री ऑफ ओरिजिन इंफॉर्मेशन नेटवर्क (ECOI) की हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बदहाली का कड़वा सच दुनिया के सामने ला दिया है. पाकिस्तान में लगातार बढ़ती कट्टरता और धार्मिक उत्पीड़न के कारण हिंदू समुदाय का वजूद खतरे में है.
रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल लगभग 5,000 हिंदू धार्मिक उत्पीड़न से तंग आकर पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर हैं, जिनमें से ज्यादातर भारत का रुख करते हैं. पलायन करने वाले इन हिंदुओं में सबसे बड़ी संख्या सिंध प्रांत के लोगों की है, जहां पाकिस्तान की सबसे अधिक हिंदू आबादी बसती है.
जरदारी के बयान का मतलब
जरदारी ने कहा कि उनका देश हिंदू को बर्दाश्त कर रहा, जिसे लेकर दुनिया में नई बहस छिड़ गई है. एक देश के राष्ट्रपति का अपने ही नागरिकों के लिए ‘बर्दाश्त करने’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करना बेहद चिंताजनक है. पाकिस्तान का संविधान भले ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात करता हो, लेकिन जब संविधान खुद इस्लाम को राज्य का आधिकारिक धर्म घोषित करता है, तब ‘बर्दाश्त’ जैसे बयान यह साबित करते हैं कि वहां अल्पसंख्यकों को बराबर का नागरिक नहीं, बल्कि दूसरे दर्जे का नागरिक माना जाता है.
पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति
पाकिस्तान की ओर से 2023 में कई गई जनगणना के अनुसार यहां हिंदू आबादी 52 लाख है, जो देश की कुल आबादी का 2.1 फीसदी है. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार देश में कुल 52.1 लाख हिंदू हैं। इसमें 8.68 लाख हिंदू जाति और 13.49 लाख अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज लोग शामिल हैं. यह संख्या राष्ट्रपति जरदारी की ओर से किए गए दावे किए गए 3 से 4 फीसदी के आंकड़े से काफी कम है.
पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं है. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां ईसाई और अहमदिया मुसलमानों को भी भीड़ की हिंसा और लगातार हमलों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, हिंदू और ईसाई लड़कियां आज भी जबरन धर्मांतरण का शिकार बनने के गंभीर खतरे का सामना कर रही हैं.
