यमन के हूती विद्रोहियों ने 14-15 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से बड़े हमले किए. सऊदी को संकट में देखकर पाकिस्तान ने भी उसे मझधार में छोड़ गया. यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में हूती के कब्जे के बाद सऊदी अरब मदद के लिए इजरायल के पास पहुंचा है. गौर करने वाली बात है कि पाकिस्तान की तरह सऊदी भी इजरायल को स्वतंत्र देश नहीं मानता है इसलिए दोनों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं.
सऊदी ने इजरायल से मांगी मदद
द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल और सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड की मध्यस्थता में बातचीत की. इसमें खुफिया सहायता के जरिए सऊदी और हूती विद्रोही के बीच स्थिति नॉर्मल हो उस पर चर्चा हुई. इजरायल के हयोम न्यूज पेपर ने अलग से यह रिपोर्ट दी है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में अन्य खाड़ी देशों और मिस्र से सहायता की अपील की थी. इसमें दावा किया गया कि मोहम्मद बिन सलमान ने यूएस सेंट्रल कमान के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से इजरायल से संपर्क किया था, जिसमें बाब अल-मंडेब स्ट्रेट (गेट ऑफ टियर्स) पर मडरा रहे खतरों को लेकर खुफिया सहायता मांगी थी.
सऊदी अरब इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता है और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं. इसके बावजूद इजरायल के साथ उसका संपर्क भले ही अप्रत्यक्ष हो, लेकिन यह यमन में सऊदी के सामने गंभीर संकट को दर्शाता है. वहीं कई देशों ने सीधे तौर पर सऊदी की अपील को अनसुना कर दिया. अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में हूतियों पर सीधे हमले से इनकार कर दिया है और इसके बजाय खुफिया सहायता और सैन्य सलाहकारों की पेशकश की है.
पाकिस्तान ने सऊदी को दिया धोखा
इससे भी जरूरी बात ये है कि पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किए मक्का डिफेंस अलाइंस के साझेदार हैं. पाकिस्तान ने कथित तौर पर यमन में हूतियों से लड़ने के लिए अपनी सेना या हथियार देने से इनकार कर दिया. इस्लामाबाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सेनाएं सऊदी क्षेत्र की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती हैं.
सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्तों तक छिटपुट ड्रोन और मिसाइल दागने के बाद हूतियों ने पिछले हफ्ते यमन में एक हमला किया, जिसने सऊदी के समर्थन वाले मोर्चे के सभी विरोध को खत्म कर दिया. हूती विद्रोहियों के अचानक हुए हमले से उन्हें लाल सागर के तट के साथ-साथ बाब अल-मंडेब के द्वीपों पर भी नियंत्रण मिल गया. इसके हूतियों ने घोषणा कर दी कि जुलाई से लागू सऊदी जहाजों पर नाकाबंदी जारी रहेगी, जबकि अमेरिका सहित अन्य देशों के जहाजों को स्वतंत्र रूप से आवागमन की अनुमति दी जाएगी.
सऊदी के सामने संकट गहराया
सऊदी अरब के लिए गेट ऑफ टियर्स एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग था, जिसके जिरए वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान द्वारा की जाने वाली किसी भी संभावित समुद्री नाकाबंदी से बचते हुए सुरक्षित रूप से तेल का निर्यात कर पाता था. अब गेट ऑफ टियर्स मार्ग बंद हो चुका है और दूसरी ओर सऊदी अरब के विशाल आंतरिक पाइपलाइन नेटवर्क को भी हमलों के जरिए निशाना बनाया गया है. समुद्री मार्ग का बंद होना और जमीनी पाइपलाइन नेटवर्क के क्षतिग्रस्त होने से सऊदी अरब का वैकल्पिक ऑयल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है.
सऊदी अरब ने इजरायल से संपर्क किया है क्योंकि हूतियों के उसका पहले भी सामना हो चुका है. साल 2023 में गाजा से जंग शुरू होने के बाद हूतियों ने रेड सी में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की ओर से जो सहायता सऊदी को दी जाएगी वह खुफिया जानकारी तक ही सीमित रहेगी.
