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5वीं फेल होने वाली नेहा बनी IAS, 8 अंकों की हार से सीखा और पूरा किया सपना


नए स्कूल और भाषा में ढलने में मुश्किल के बाद क्लास 5 में फेल होने से लेकर, अपने पहले तीन अटेम्प्ट में यूपीएससी मिस करने तक उनका सफर बताता है की मुश्किलें हमेशा आखिरी रिजल्ट तय नहीं करती है. नेहा ने अपने चौथे अटेम्प्ट में यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2021 में ऑल इंडिया रैंक 569 हासिल की और सिर्फ 24 साल की उम्र में आईएएस ऑफिसर बन गई.

राजस्थान के जयपुर में जन्मी नेहा का ज्यादातर बचपन एक शहर से दूसरे शहर में बिता. क्योंकि उनके पिता की नौकरी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में थी. उन्होंने जयपुर, भोपाल, बिलासपुर, कोरबा और रायपुर में पढ़ाई की और बार-बार स्कूल बदले और नए माहौल में ढल गई.

राजस्थान के जयपुर में जन्मी नेहा का ज्यादातर बचपन एक शहर से दूसरे शहर में बिता. क्योंकि उनके पिता की नौकरी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में थी. उन्होंने जयपुर, भोपाल, बिलासपुर, कोरबा और रायपुर में पढ़ाई की और बार-बार स्कूल बदले और नए माहौल में ढल गई.

इन बदलाव में से एक बदलाव बहुत मुश्किल साबित हुआ. दरअसल इंग्लिश मीडियम स्कूल में जाने के बाद उन्हें भाषा में दिक्कत हुई और वह क्लास 5 में फेल हो गई. इसके बाद नेहा ने अपने पिछले स्कूल में वापस जाने के बजाय, मेहनत करने और चुनौती से पार पाने का फैसला किया.

इन बदलाव में से एक बदलाव बहुत मुश्किल साबित हुआ. दरअसल इंग्लिश मीडियम स्कूल में जाने के बाद उन्हें भाषा में दिक्कत हुई और वह क्लास 5 में फेल हो गई. इसके बाद नेहा ने अपने पिछले स्कूल में वापस जाने के बजाय, मेहनत करने और चुनौती से पार पाने का फैसला किया.

इसके बाद नेहा ने धीरे-धीरे अपना कॉन्फिडेंस वापस बनाया और पढ़ाई अच्छा करने की कोशिश की. इसके बाद वह यूनिवर्सिटी टॉपर बनी, जिससे उनका कॉन्फिडेंस और पक्का हो गया. वहीं लगातार कोशिश करने से शुरुआती असफलताओं से निपटा जा सकता है, यही उन्होंने अपना मन में ठान लिया था.

इसके बाद नेहा ने धीरे-धीरे अपना कॉन्फिडेंस वापस बनाया और पढ़ाई अच्छा करने की कोशिश की. इसके बाद वह यूनिवर्सिटी टॉपर बनी, जिससे उनका कॉन्फिडेंस और पक्का हो गया. वहीं लगातार कोशिश करने से शुरुआती असफलताओं से निपटा जा सकता है, यही उन्होंने अपना मन में ठान लिया था.

इसके बाद अपने परिवार से हिम्मत पाकर नेहा ने सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया. वहीं शुरूआती अटेम्प्ट्स में वह प्रीलिम्स एग्जाम भी क्लियर नहीं कर पाई थी, जबकि अपने तीसरे टाइम में उन्होंने प्रीलिम्स तो क्लियर कर लिया, लेकिन मेंस एग्जाम पास नहीं कर पाई. वहीं जहां कई लोग एक या दो बार फेल होने के बाद बाद वहीं रुक जाते हैं.  लेकिन नेहा ने वहीं रुकने की बजाय फिर से तैयारी जारी रखने का फैसला किया.

इसके बाद अपने परिवार से हिम्मत पाकर नेहा ने सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया. वहीं शुरूआती अटेम्प्ट्स में वह प्रीलिम्स एग्जाम भी क्लियर नहीं कर पाई थी, जबकि अपने तीसरे टाइम में उन्होंने प्रीलिम्स तो क्लियर कर लिया, लेकिन मेंस एग्जाम पास नहीं कर पाई. वहीं जहां कई लोग एक या दो बार फेल होने के बाद बाद वहीं रुक जाते हैं.  लेकिन नेहा ने वहीं रुकने की बजाय फिर से तैयारी जारी रखने का फैसला किया.

 उसके बाद  नेहा ने अपनी स्ट्रेटजी पूरी तरह बदल दी. वह लगभग 3 साल तक अपने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूर रही. रिवीजन, मॉक टेस्ट और आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा समय दिया और अपने कमजोर एरिया को सुधारने के लिए सिस्टमैटिक तरीके से काम किया. जिसके बाद उनकी मेहनत रंग लाई और नेहा ने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक 569 हासिल की और सिर्फ 24 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी के रूप में गुजरात कैडर में शामिल हो गई.

 उसके बाद  नेहा ने अपनी स्ट्रेटजी पूरी तरह बदल दी. वह लगभग 3 साल तक अपने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूर रही. रिवीजन, मॉक टेस्ट और आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा समय दिया और अपने कमजोर एरिया को सुधारने के लिए सिस्टमैटिक तरीके से काम किया. जिसके बाद उनकी मेहनत रंग लाई और नेहा ने अपने चौथे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक 569 हासिल की और सिर्फ 24 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी के रूप में गुजरात कैडर में शामिल हो गई.

फिलहाल आईएएस ऑफिसर नेहा हरदोई उत्तर प्रदेश में चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर के तौर पर काम कर रही है. ऑफिसर नेहा यूपीएससी कैंडिडेट को यह सलाह देती है कि सफलता इस बात से तय नहीं होती कि पढ़ाई में कितने घंटे लगे. बल्कि इस बात से तय होती है कि उन घंटों का कितने अच्छे से इस्तेमाल किया गया है. उनका मानना है कि डिसिप्लिन प्लानिंग, रेगुलर रिवीजन, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और कंसिस्टेंसी सिर्फ लंबे समय तक पढ़ाई करने से कहीं ज्यादा मायने रखती है.

फिलहाल आईएएस ऑफिसर नेहा हरदोई उत्तर प्रदेश में चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर के तौर पर काम कर रही है. ऑफिसर नेहा यूपीएससी कैंडिडेट को यह सलाह देती है कि सफलता इस बात से तय नहीं होती कि पढ़ाई में कितने घंटे लगे. बल्कि इस बात से तय होती है कि उन घंटों का कितने अच्छे से इस्तेमाल किया गया है. उनका मानना है कि डिसिप्लिन प्लानिंग, रेगुलर रिवीजन, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और कंसिस्टेंसी सिर्फ लंबे समय तक पढ़ाई करने से कहीं ज्यादा मायने रखती है.

Published at : 27 Oct 2026 04:20 PM (IST)

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