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Jamaat-e-Islami Hind: बंगाल हिंसा पर जमात ए इस्लामी भड़की, बोली- ‘मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर…’, जानें और क्या कहा


जमात-ए-इस्लामी हिंद (Jamaat-e-Islami Hind) के नेताओं ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने चुनाव के बाद की स्थिति, चुनाव प्रक्रिया और अलग-अलग राज्यों के हालात को लेकर कई बातें रखी हैं. 5 राज्यों के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. संगठन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वहां चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर भीड़ ने हमला किया है.

जमात-ए-इस्लामी हिंद के ही एक और उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद अब सरकारों को लोगों की भलाई, शिक्षा और सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भी सवाल उठाए. उनके अनुसार SIR प्रक्रिया के कारण कई लोग वोट नहीं डाल पाए. उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव पूरी तरह साफ और सही तरीके से हुए या कहीं गड़बड़ी हुई है.

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मुस्लिम समुदाय के लोगों को वोट देने में दिक्कत

मोतासिम खान ने यह भी कहा कि पसमांदा, दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों को वोट देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले हुए और केंद्रीय बलों पर भी कुछ राजनीतिक दलों की मदद करने के आरोप लगे. चुनाव के नतीजे आने के बाद भी कई जगहों पर हिंसा की खबरें सामने आई हैं. कुछ राजनीतिक दलों के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया है. असम चुनाव को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई. उनका कहना है कि वहां चुनाव के दौरान हेट स्पीच और भड़काऊ बयान दिए गए, जिससे चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं.

देश की राजनीति में देखने को मिलेगा बदलाव

केरल के बारे में उन्होंने कहा कि वहां पिछले 10 साल में राजनीतिक बदलाव होना एक सामान्य बात रही है. वहीं तमिलनाडु में इस बार लोकतांत्रिक तरीके से एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा ही बदलाव आने वाले समय में, खासकर 2031 तक, देश की राजनीति में भी देखने को मिल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान शिक्षा, महंगाई और विकास जैसे असली मुद्दों पर कम बात हुई, जबकि सांप्रदायिक मुद्दों को ज्यादा बढ़ावा दिया गया. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले कुछ एजेंसियों और चुनाव आयोग के इस्तेमाल जैसे तरीके भी अपनाए गए. उनका कहना है कि अगर इतने प्रयासों के बाद भी किसी को जीत नहीं मिलती तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं.

प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर का बयान

प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि इन चुनावों ने देश की जनता के सामने एक बड़ा संदेश रखा है. अब यह सवाल उठता है कि क्या देश में लोकतंत्र सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और आम लोगों दोनों को इस बात पर गंभीरता से सोचना होगा कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें और ज्यादा जागरूक होना होगा. उनका मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे SIR प्रक्रिया के असर को भी दिखाते हैं.

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