महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले से किसानों की बदहाली की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है जहां एक किसान ने 1262 किलो प्याज मंडी में बेचा. लेकिन कमाई होने के बजाय उसे उल्टा 1 रुपया अपनी जेब से देना पड़ा. यह मामला अब किसानों की हालत और गिरते कृषि बाजार भाव पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.
यह मामला पैठण तालुका के वरुडी गांव के किसान प्रकाश गलधर से जुड़ा है. प्रकाश गलधर ने करीब तीन महीने तक मेहनत कर प्याज की फसल तैयार की थी. उन्हें उम्मीद थी कि फसल बिकने के बाद घर का खर्च चलेगा, बच्चों की फीस भरी जाएगी और कुछ कर्ज भी कम होगा, लेकिन मंडी में उन्हें बड़ा झटका लगा.
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किसान के साथ मंडी में क्या हुआ?
किसान 25 बोरियों में भरकर अपना प्याज कृषि उपज मंडी लेकर पहुंचे. प्याज का कुल वजन 1262 किलो निकला. लेकिन मंडी में प्याज का भाव मिला सिर्फ 100 रुपए प्रति क्विंटल, यानि एक किलो प्याज की कीमत लगी महज 1 रुपया. 1262 किलो प्याज बेचने पर किसान को कुल 1262 रुपए मिले, लेकिन मंडी तक प्याज पहुंचाने और बिक्री से जुड़े खर्च इससे भी ज्यादा निकले.
किसान से हमाली के 125 रुपए, तुलाई के 38 रुपए, भराई के 25 रुपए, वाराई के 25 रुपए, मंडी तक लाने का किराया 500 रुपए और 25 बोरियों का खर्च 550 रुपए यानि 1263 रुपए का कुल खर्च हुआ और किसान को अपनी जेब से 1 रुपया अतिरिक्त देना पड़ा.
किसानों की हालत पर सवाल
यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों किसानों की पीड़ा है, जो महीनों मेहनत करके फसल उगाते हैं.लेकिन बाजार में उन्हें उनकी मेहनत की सही कीमत तक नहीं मिलती. इस घटना के बाद एक बार फिर कृषि व्यवस्था, फसल के दाम और किसानों की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठने लगे है.
किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और गिरते बाजार भाव के बीच खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है. जिस किसान को अपनी मेहनत की फसल बेचकर राहत मिलनी चाहिए थी. उसी किसान को मंडी से घाटा लेकर लौटना पड़ा.
छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई यह घटना अब किसानों की बदहाल स्थिति की बड़ी तस्वीर बन गई है.आज सवाल सिर्फ 1 रुपए के नुकसान का नहीं है. सवाल उस व्यवस्था का है, जहां देश का अन्नदाता अपनी ही मेहनत की सही कीमत पाने के लिए संघर्ष कर रहा है.
बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलें
महाराष्ट्र राज्य के किसान अचानक हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण खड़ी फसलों को हुए नुकसान के बाद बढ़ती परेशानी का सामना कर रहे हैं, जबकि प्याज की कीमतें कई बाजारों में 50 पैसे से लेकर 1 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई हैं, जिससे किसानों में गुस्सा है और जिसके चलते उनमें विरोध की तस्वीर उभर पड़ी है.
अप्रैल के दौरान महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे 15 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर रबी की फसलें बर्बाद हो गईं. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में नासिक, अहमदनगर और मराठवाड़ा के कुछ हिस्से शामिल हैं, जहां अधिकतर प्याज और गेहूं को भारी नुकसान हुआ है.
प्याज की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान
इनमें से प्याज किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. खबरों के मुताबिक, लगभग 44,000 हेक्टेयर प्याज की खेती प्रभावित हुई है, जबकि रिकॉर्ड उत्पादन, कमजोर निर्यात, अपर्याप्त भंडारण बुनियादी ढांचे और घटती मांग के कारण बाजार मूल्य में भारी गिरावट आई है.
स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के नेतृत्व में किसान संगठनों ने 15 मई को मुंबई में विरोध मार्च की घोषणा की है. यह मार्च गिरगाँव चौपाटी से शुरू होकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास वर्षा तक जाएगा.
उद्धव गुट ने दी आंदोलन की चेतावनी
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना उद्घव गुट ने इस आंदोलन को साथ देने की बात कही है. महाराष्ट्र भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में से एक है, जहां नासिक, अहमदनगर, धराशिव, बीड, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में लाखों किसान इस फसल पर निर्भर हैं.
कृषि बाजार में फसल लगभग 3-4 लाख रुपये का निवेश आवश्यक था, लेकिन मंडी में प्याज की कीमत गिरकर लगभग 1 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थी, जिससे बिक्री आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो गई थी.
धाराशिव में किसान को मिल रहा 1 रुपये का भाव
धाराशिव जिले के भूम तालुका के टिंटराज के प्याज उत्पादक किसान भगवान साबले ने 2.5 एकड़ में 600 बोरियों में प्याज की फसल उगाई थी, लेकिन चूंकि उन्हें एक रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा था, इसलिए गुस्साए किसान ने प्याज की 600 बोरियों में आग लगा दी.
उन्होंने चार एकड़ में प्याज लगाया था, जिसमें से 2.5 एकड़ में प्याज की कटाई और कटाई की गई थी, और प्याज पर 3 से 4 लाख रुपये खर्च हुए थे. लेकिन, चूंकि भाव एक रुपये प्रति किलो का मिल रहा था, इसलिए गुस्साए किसान ने प्याज में आग लगा दी और अब किसान से मदद की मांग की गई है.
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