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राम मंदिर विवाद: सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस भी गायब? दान देने वाले पूर्व गृह सचिव ने उठाए सवाल


अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला देशभर में गरमाया हुआ है. इस बीच राम मंदिर में साढ़े आठ सौ ग्राम सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. दान देने वाले पूर्व गृह सचिव ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है.

एबीपी न्यूज से बात करते हुए एस लक्ष्मीनारायण ने बताया कि 8 अप्रैल 2024 को हमने सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस का दान किया था, लेकिन मांगने के बावजूद कोई रसीद नहीं दी गई और ना ही कोई पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) मिली. 

‘मां-पत्नी के गहने गलाकर रामचरितमानस करवाई थी तैयार’

उन्होंने बताया कि अपनी मां और पत्नी के गहने गलाकर उन्होंने बेशकीमती रामचरितमानस तैयार करवाई थी, लेकिन अभी वो कहां है, ये नहीं पता है. उन्होंने कहा, ”RSS चीफ मोहन भागवत से भी मुलाकात कर चुके हैं लेकिन उनसे मिले आश्वासन के एक साल बाद भी कोई मदद नहीं मिली.”

चंपत राय से भी लक्ष्मीनारायण ने की थी मुलाकात

एस लक्ष्मीनारायण ने आगे कहा, ”यूपी में CM योगी आदित्यनाथ के सलाहकार रहे अवनीश अवस्थी से जब परेशानी बताई तो कहा गया कि दान दिया था तो दान समझकर जाने दीजिए. चंपत राय से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि मैं जो चाहूंगा वही मंदिर में होगा.” 

रामचरितमानस की रोजाना होती थी पूजा- लक्ष्मीनारायण

लक्ष्मीनारायण ने ये भी बताया कि रामचरितमानस को शुरू में मंदिर में प्रदर्शित किया गया था और भक्त इसे देख सकते थे, रोजाना इसकी पूजा होती थी, लेकिन अचानक इसे हटा दिया गया और अभी वो कहां है, मुझे नहीं पता, चिंता भी हो रही है.

इस पूरे मामले की जिम्मेदारी चंपत राय की- लक्ष्मीनारायण

उन्होंने कहा, ”इस पूरे मामले की जिम्मेदारी चंपत राय जी की है क्योंकि उन्हीं की निगरानी में मंदिर का मैनेजमेंट था और वो सोचते थे कि मंदिर उनका है लेकिन ऐसा नहीं है, ये मंदिर भगवान का है और ये मंदिर 500 साल के संघर्ष के बाद भक्तों को मिला है.” 

रामचरित मानस में सोने की परत चढ़े 522 पन्ने

लक्ष्मीनारायण और उनकी पत्नी सरस्वती ने राम मंदिर ट्रस्ट को सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस दान की है और यह पांडुलिपि सोने, चांदी और तांबे से बनी है और इसका वज़न लगभग 147 किलोग्राम है. इसमें सोने की परत चढ़े 522 पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक लिखे हैं. इसे अप्रैल 2024 में राम मंदिर ट्रस्ट को भेंट किया गया था. ABP News के पास भेंट की गई रामचरितमानस की तस्वीरें भी हैं.

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