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Russia-Ukraine War: यूक्रेन के ड्रोन हमलों से ब्लैक सी के अहम रूट बंद, रूस को बर्बाद करने पर तुले जेलेंस्की, पुतिन की बढ़ी टेंशन


रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब समुद्री मोर्चा भी बेहद अहम होता जा रहा है. यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस को आजोव सागर के कुछ जरूरी रूट पर यातायात रोकना पड़ा है. इससे रूस के व्यापार, सैन्य सप्लाई और ग्लोबल एक्सपोर्ट नेटवर्क पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. आजोव सागर रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र माना जाता है. यह केर्च स्ट्रेट के जरिए ब्लैक शी से जुड़ता है और दक्षिणी रूस के कई बड़े बंदरगाहों को दुनिया के समुद्री बिजनेस रूट से जोड़ता है. लंबे समय तक यह इलाका रूस के लिए सुरक्षित माना जाता था, लेकिन अब यूक्रेन के बढ़ते ड्रोन हमलों ने स्थिति बदल दी है.

यूक्रेन की ड्रोन फोर्स के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवडी ने दावा किया है कि पिछले 9 दिनों में यूक्रेन ने आजोव सागर क्षेत्र में 116 रूसी जहाजों को निशाना बनाया है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों की तरफ से जारी कुछ वीडियो में समुद्री टारगेटों पर हमले दिखाई दिए हैं. लगातार हमलों के बाद रूस को दो अहम समुद्री मार्गों पर आवाजाही रोकनी पड़ी है. इनमें डॉन-आजोव चैनल शामिल है, जो आजोव सागर को रूस के अंदरूनी रूट से जोड़ता है. दूसरा केर्च स्ट्रेट है, जो आजोव सागर और ब्लैक सी के बीच खास कॉन्टेक्ट रूट है.

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सैटेलाइट इमेज के जरिए मिले सबूत

सैटेलाइट इमेज और जहाजों की निगरानी करने वाली एजेंसी के अनुसार, इन रूट के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं और लंबी कतारें लग गई हैं. इससे समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है और कई जहाजों को अपने मंजिल तक पहुंचने में देरी हो रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर केवल ऑयल ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा. रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं इम्पोर्टर है और वैश्विक गेहूं निर्यात में उसका हिस्सा लगभग 20 फीसदी है. अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार रूस के गेहूं निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है. ब्लैक सी एग्रीकल्चर मार्केट बाजार के एक्सपर्ट्स एंड्री सिज़ोव के अनुसार रूस के कुल गेहूं निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा आजोव सागर के रास्ते भेजा जाता है. उनका कहना है कि अगर मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है.

गेहूं के अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी

हाल के दिनों में गेहूं के अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स बाजार में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आजोव सागर में बढ़ते तनाव और निर्यात में संभावित बाधा इसके प्रमुख कारणों में से एक है. रूस का कहना है कि वह अपने अनाज निर्यात को ब्लैक सी के अन्य बंदरगाहों के जरिए जारी रख सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल कटाई और निर्यात के चरम समय में केवल दूसरे बंदरगाहों के सहारे पूरी आपूर्ति को संभालना आसान नहीं होगा. यूक्रेन का कहना है कि उसके हमलों का मकसद रूस की सैन्य आपूर्ति और कब्जे वाले क्षेत्रों तक पहुंचने वाले लॉजिस्टिक नेटवर्क को कमजोर करना है. यूक्रेनी सेना के अधिकारियों के अनुसार क्रीमिया और दक्षिणी यूक्रेन में मौजूद रूसी सैन्य ठिकानों तक जाने वाली सप्लाई चेन को निशाना बनाया जा रहा है.

यूक्रेन ने रूस के किन आरोपों को किया खारिज?

यूक्रेन की 413वीं सेपरेट रेजिमेंट ऑफ अनमैन्ड सिस्टम्स के कमांडर मेजर इवेन करास ने कहा है कि रूस ने क्रीमिया को एक बड़े सैन्य केंद्र में बदल दिया है और यूक्रेन उन सभी रास्तों को बाधित करने की कोशिश कर रहा है, जिनके जरिए वहां सैन्य सामग्री पहुंचती है. दूसरी ओर रूस ने इन हमलों को आतंकवादी कार्रवाई बताया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि आजोव सागर में यूक्रेन की गतिविधियां समुद्री डकैती से भी आगे बढ़ चुकी हैं और उनका मकसद केवल नुकसान पहुंचाना और डर फैलाना है. यूक्रेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि वह केवल सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना रहा है.

क्रीमिया पर रूस ने कब किया था कब्जा?

आजोव सागर को लेकर संघर्ष नया नहीं है. 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद से इस क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. फरवरी 2022 में रूस के बड़े सैन्य अभियान के बाद आजोव सागर के आसपास के अधिकांश यूक्रेनी तटीय क्षेत्रों पर रूस का नियंत्रण हो गया था. इसके बाद रूस ने इस समुद्री क्षेत्र को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया. अब यूक्रेन के ड्रोन हमलों और बढ़ती समुद्री क्षमताओं ने इस क्षेत्र में रूस की स्थिति को चुनौती देना शुरू कर दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह ऑपरेशन जारी रहता है, तो इसका असर केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है.

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